लीज नवीनीकरण नहीं होने से सुरदा काॅपर माइंस बंद, बेरोजगार हुए मजदूर सरकार से लगा रहे गुहार

    लीज नवीनीकरण नहीं होने से सुरदा काॅपर माइंस बंद, बेरोजगार हुए मजदूर सरकार से लगा रहे गुहार

    एचसीएल की सुरदा माइंस का लीज खत्म होने के साथ ही करीब 1500 मजदूरों के समक्ष रोजगार की समस्या उत्पन्न हो गई हैं.मालूम हो कि सुरदा माइंस 1995 से  बंद रहने के बाद दोबारा वर्ष 2007 में शुरू हुई थी. माइंस के डेवलपमेंट से लेकर ऑपरेशन तक की जिम्मेवारी इंडिया रिसोर्सेज लिमिटेड (आईआरएल) को सौंपी गई थी. आईआरएल द्वारा माइंस से हाथ खींचने के बाद प्रबंधन ने बाकी ठेकेदारों के माध्यम से चलाने का प्रयास किया और अंत में संचालन की जिम्मेवारी खुद ही संभाल ली। पिछले कुछ वर्षों से एचसीएल की मऊभंडार स्थित यूनिट इंडियन कॉपर कॉम्प्लेक्स (आईसीसी) प्रबंधन ही सुरदा माइंस के डेवलपमेंट से लेकर ऑपरेशन तक का काम कर रही है। यही कारण है कि एचसीएल प्रबंधन पिछले कुछ दिनों से सुरदा माइंस के डेवलपमेंट एंड ऑपरेशन को लेकर नए सिरे से कई दफा टेंडर भी निकाला जो लीज की अवधि के संशय के कारण अब तक संभव नहीं हो सका है.

    सुरदा एचसीएल की सबसे पुरानी खदानों में से एक है, जिसकी शुरुआत ब्रिटिश सरकार ने की थी। मुसाबनी प्रखंड क्षेत्र में कुल 388 हेक्टेयर में फैली सुरदा माइंस की क्षमता 300 टन प्रतिवर्ष है। इसमें कॉपर का ग्रेड प्वाइंट 9 से 1 परसेंट का है। सुरदा माइंस के अधीन ही फेज-टू की भी जमीन है। जिसके लीज की अवधि 31 मार्च 2020 को खत्म हो गई। तय नियमों के मुताबिक लीज की अवधि समाप्त होने के बाद एचसीएल माइंस में डी-वाटरिंग को छोड़ दूसरा कोई भी काम नहीं हो सकता है। वहीं फेज-टू में जारी डेवलमेंट का काम भी अब शुरू नहीं हो सकेगा। एचसीएल प्रबंधन 20 वर्ष के लीज एक्सटेंशन को लेकर बीते कई माह से कोशिश कर रही  थी। इसके लिए भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से एन्वायरमेंट क्लियरेंस लेने का प्रयास चल रहा था। एन्वायरमेंट क्लियरेंस हासिल होने के बाद ही राज्य सरकार सुरदा माइंस का लीज एक्सटेंशन कर सकती थी। हालांकि इन प्रयासों के बाद भी एचसीएल को सुरदा माइंस का लीज एक्सटेंशन हासिल नहीं हो सका और लीज खत्म होने के साथ ही सुरदा माइंस में उत्पादन का काम भी बंद हो गया है।

    आपको बता दें कि वर्ष 1995 से 2003 तक  एचसीएल आईसीसी  ने अपने कुल 6 माइंस को उत्पादन मे घाटा होने का कारण बताते हुए सभी माइंस को बंद कर दिया था , जिसमें पाथरगोड़ा , बानालपा , बादिया , सुरदा , केन्दाडीह , राखा माइंस शामिल है , पहले करीबन 20 हजार मजदूर काम करते थे , जो माइंस बंद होने के बाद कुछ ही रह गये है. इसके बाद फिर से 2007  मे सुरदा माइंस को खोला गया था , लेकिन वह भी आज लीज नवीकरण नहीं होने पर उत्पादन बंद पड़ा है ,  जिससे सुरदा माइंस मे काम करने वाले 1500 मजदूर बेकार हो गये है.

    रिपोर्ट : प्रभंजन कुमार , घाटशिला, पूर्वी सिंहभूम

    बता दें कि पूर्वी सिंहभूम के मुसाबनी प्रखंड में सुरदा माइंस बंद होने पर 1500 मजदूर बेकार हो गये है, जिससे मजदूरों की हालत बेहद खराब होती जा रही है । उसके बाद रोजगार को लेकर अब मजदूरों ने अपना आंदोलन तेज कर दिया है ।   अब मजदूरों ने अपने अपने तरीके से ग्रुप बना कर आंदोलन करना शुरू किया है ऐसे में मजदूरों ने एचसीएल आईसीसी से कम से कम 10 दिन का रोजगार देने की मांग पर अपना आंदोलन शुरू किया तो वही कुछ मजदूरों ने मजदूर यूनियन के साथ मिलकर लीज नवीकरण की मांग पर सड़क पर जुलूस निकालकर कर विरोध प्रदर्शन किया .


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