1932 खतियान - झरिया विधायक बुधवार को बोलीं,गुरुवार को चुप, धनबाद विधायक कल बोलेंगे

    1932 खतियान - झरिया विधायक बुधवार को बोलीं,गुरुवार को चुप, धनबाद विधायक कल बोलेंगे

    धनबाद(DHANBAD): झारखंड कैबिनेट से बुधवार को 1932 के  खतियान लागू करने और 27 फ़ीसदी ओबीसी आरक्षण को मंजूरी देने के कम से कम 15 घंटे के बाद ही धनबाद के लगभग सभी राजनीतिक दलों के प्रमुख नेताओं ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली है.  बुधवार की रात तक तो लोगों का बयान आया, सड़कों पर जश्न भी दिखा लेकिन गुरुवार को कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं था.  कोई कहता है कि हम कल बयान देंगे, कोई कहता है कि इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहना है तो कोई कहता है कि हम अभी बीमार हैं. कारण चाहे जो भी हो लेकिन ऐसा लगता है कि झारखंड के इस सियासी दांव में सभी दल फूंक-फूंक कर कदम रखना चाह रहे हैं और रख भी रहे हैं. 

    गुरुवार को कैमरा से सभी चाह रहे थे बचाना 

    गुरुवार को The Newspost की  टीम ने कम से कम तीन नेताओं से संपर्क करने की कोशिश की. उनमें झरिया से कांग्रेस की विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह, धनबाद से भाजपा विधायक राज सिन्हा और झारखंड मुक्ति मोर्चा के जिला अध्यक्ष रमेश टू डू शामिल है. किसी ने भी ऑन कैमरा कुछ कहने से परहेज किया.  सब मामले को कोई न कोई बहाना बनाकर टालते रहे. आखिर ऐसा क्यों ,कांग्रेस तो  सरकार में शामिल है, जेएमएम की अगुवाई में सरकार चल रही है. भाजपा आरक्षण का भले समर्थन करती हो लेकिन 1932 के खतियान का वह  समर्थन संभवत नहीं कर सकती है. ऐसे में नेताओं की चुप्पी कई संदेहों  को जन्म देता है.आखिर यह मामला क्या है, ऐसा तो नहीं महीनों  से उलझन में पड़ी झारखंड सरकार चुनाव की तैयारी में जुट गई है. और गठबंधन दल  समर्थक बने हुए है. अपुष्ट जानकारी के अनुसार आलाकमान ने निर्देश दिया है कि इस संबंध में पार्टी स्तर  पर ही कोई बयान निर्गत होगा. वैसे आज के अखबारों में सांसद पीएन सिंह, झरिया विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह का बयान छपा है.  

    बुधवार को सांसद पीएन सिंह ,विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह ने दिया था बयान 

    पी एन सिंह ने कहां है कि यह पूरी तरह से  राजनीतिक स्टंट है.  राज्य सरकार झारखंड की सीधी-सादी जनता को गुमराह कर रही है.  वोट की राजनीति का यह प्रयास है.  इधर , झरिया विधायक पूर्णिमा  नीरज सिंह  का बयान  छापा है कि  यह प्रस्ताव रखंड को फिर से जलाने वाला है.  हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि कैबिनेट से पास प्रस्ताव विधानसभा में भी पास हो. सरकार को चाहिए कि वह ऐसा स्ताव लाए जो कोर्ट में टिक सके.  वैसे आज के अख़बार में टुंडी विधायक मथुरा महतो का भी बयान  छापा है ,जिसमे उन्होंने कहा है कि  झारखंड में 1932 खतियान के आधार पर स्थानीय नीति को  परिभाषित करने का प्रस्ताव पास होने से करोड़ों लोगों  को अधिकार मिल गया है



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