ना चली पैसों की खनक, ना ही चली पाॅवर की गर्मी, विधायक पत्नी को हरा रोज बनी जिप अध्यक्ष

    ना चली पैसों की खनक, ना ही चली पाॅवर की गर्मी, विधायक पत्नी को हरा रोज बनी जिप अध्यक्ष

    सिमडेगा(SIMDEGA): सिमडेगा में गांव की सरकार का गठन करने में सभी दलों की एकजुटता नजर आई. यहां कांग्रेस समर्थित जिला परिषद अध्यक्ष पद पर आसीन हुई तो भाजपा समर्थित जिला परिषद उपाध्यक्ष बनी.

    पंचायत चुनाव होने के बाद से ही सिमडेगा में पाकरडांड से जिला परिषद सदस्य के रूप में विजेता जोसिमा खाखा के जिला परिषद अध्यक्ष बनने की चर्चा जोरो पर रही थी. हालांकि कांग्रेस के कई लोग अलग जिला परिषद अध्यक्ष बनाना चाहते रहे. जोड़-तोड़ काफी चली, तरह-तरह के प्रलोभन भी दिए जाने की सूचनाएं सूत्रों के माध्यम से मिली. लेकिन, गांव की सरकार गठन में आज ना तो पैसों की खनक काम आयी और ना हीं पाॅवर की गर्मी चली.

    सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस जिलाध्यक्ष अनूप केशरी ने झापा नेत्री आइरिन एक्का, भाजपा समर्थित जिला परिषद सदस्य और जेएमएम जिला सचिव शफीक खान के साथ मिलकर राजनीतिक एकता का ऐसा जादू चलाया कि चुनाव बाद सबके दिमाग में जिप अध्यक्ष पद को लेकर बने सभी समीकरण पलट गए और सबकी सोच के परे जाकर गांव की सरकार का गठन हुआ.

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    विधायक की पत्नी ने पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ किया नामांकन

    सूत्रों की मानें तो जिला परिषद अध्यक्ष पद के लिए पाकरडांड जिला परिषद सदस्य सह सिमडेगा विधायक भूषण बाडा की पत्नी जोसिमा खाखा और कांग्रेस समर्थित कोलेबिरा जिला परिषद सदस्य रोज प्रतिमा सोरेंग ने नॉमिनेशन किया था. जिसके बाद वोटिंग हुई, जिसमें रोज प्रतिमा सोरेंग ने जोसिमा खाखा को एक वोट से पराजित कर जिप अध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा जमाया. वहीं उपाध्यक्ष पद पर भाजपा समर्थित कुरडेग जिला परिषद सदस्य सोनी कुमारी पैंकरा ने कब्जा जमाया.  

    गांव के विकास के लिए अचंभित करने वाले परिणाम के बाद सर्वदलीय पावर वाली गठित गांव की सरकार ने सभी राजनीतिक दलों के पदधारियों और समर्थकों के चेहरे पर मुस्कान ला दी. परिणाम घोषणा के बाद सभी ने होली-दिवाली एक साथ मनाई. सभी दलों के पदधारियों और समर्थकों ने विजेताओं के साथ विजेता जिप सदस्यों की टीम का जोरदार अभिनंदन किया. हर तरफ जश्न का महौल बन गया.

    लोगों के बीच चर्चा तेज  

    हालांकि जिला परिषद अध्यक्ष पद के इस अचंभित करने वाले परिणाम के बाद लोगों मे ये चर्चाएं भी तेज हो गई   कि कांग्रेस विधायक की पत्नी ने कांग्रेस को समर्थन नहीं कर पार्टी समर्थित उम्मीदवार के विरूद्ध क्यों नामांकन किया. क्या कांग्रेस कमिटी और विधायक के बीच कोई दीवार खड़ी हो गई है. आखिर खुद के निर्वाचित सदस्य रहते हुए भाजपा समर्थित सदस्यों का सहयोग क्यों लेना पडा. खैर जितने मुंह उतनी बातें. अब वास्तविकता क्या है ये तो पार्टी के लोग हीं जाने. लेकिन जिप अध्यक्ष के परिणाम इन चर्चाओं को बल जरूर दे रहे हैं. अब लोगों के मन अनुरूप गांव की सरकार का गठन हो गया है. जो लोगों की उम्मीदों पर खरी उतर विकास को हीं अपना कर्म बना कर चलेगी ऐसी उम्मीद है.

    रिपोर्ट: अमित रंजन, सिमडेगा  

     


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