हरे-भरे सारंडा जंगल के दर्जनभर गांवों में पानी को तरसते ग्रामीण, फैला आक्रोश

    हरे-भरे सारंडा जंगल के दर्जनभर गांवों में पानी को तरसते ग्रामीण, फैला आक्रोश

    चाईबासा (CHAIBASA) – कहते हैं कि जल ही जीवन है. लेकिन लोगों को जल ही न मिले तो उनका जीवन कैसा होगा ये तो आप भली-भांति जानते होंगे. एशिया का बड़ा जंगल कहा जाने वाला सारंडा ही पानी को तरस रहा है.  इलाके के 13 गांवों में जल संकट गहरा गया है.  डीएमएफटी फंड से सारंडा के गांगदा पंचायत के दोदारी गांव में बने जल मीनार से मात्र उसी गांव के लोगों को पानी नसीब हो पा रहा है, जिससे बाकी गांवों में आक्रोश है. 

     

    नहीं शुरु हुई पानी की सप्लाई

    गांगदा पंचायत के नव निर्वाचित मुखिया राजू सांडिल ने बताया कि जल मीनार से हमारे पंचायत में सिर्फ दोदारी गांव में ही पेयजल आपूर्ति हो रही है. जबकि तेरह गांवों में पानी आपूर्ति नहीं हो रही है. इससे ग्रामीण गर्मी में पेयजल संकट से जूझ रहे हैं. मुखिया ने कहा कि दोदारी के अलावे कुछ गांवों को छोड़कर तमाम गांवों में पाइप लाइन बिछायी गयी है. लेकिन घर-घर पाइप का कनेक्शन या गांवों में पानी सप्लाई प्रारम्भ नहीं किया गया. अगर पीएचडी विभाग सरकारी प्रावधानों अनुसार जल मीनार से पंचायत के सभी गांवों में जल्द पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित नहीं कराती है तो गांगदा पंचायत के तमाम गांवों के मानकी-बुंडा और बुद्धिजीवी वर्ग पीएचडी विभाग में ताला लगाएगा और अनिश्चित कालिन धरना देंगे.

    आंकड़े

    उल्लेखनीय है कि दोदारी गांव के जलमिनार से गांगदा पंचायत के गांगदा, दुईया, सलाई, घाटकुड़ी, टिमरा, राडुवा, मम्मार, हिनुआ, कासिया-पेचा, सोदा, चुर्गी, दोदारी, रोवाम, कुम्बिया अर्थात चौदह गांव के ग्रामीणों को सीधे शुद्ध पेयजल मिलना है. गांगदा पंचायत की कुल आबादी- 6258, योजना की प्राक्लित राशी- 1437.78 लाख रुपये, जल शोध संयंत्र की क्षमता-1.20 एमएलडी, इस योजना के दो जलमिनार जिसमें 1.80 लाख लीटर क्षमता का दोदारी एंव 1.15 लाख लीटर क्षमता का काशिया-पेचा में बनना था, पानी पाइप की कुल लम्बाई- 56 किलोमीटर लगभग, योजना का श्रोत-कोयना नदी जिसके इंटेक वेल में 20 एचपी का मोटर लगाया गया है।

    रिपोर्ट: संदीप गुप्ता, चाईबासा, गुवा


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