माउंट एवरेस्ट के दक्षिण शिखर तक पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनीं अस्मिता दोराजी

    माउंट एवरेस्ट के दक्षिण शिखर तक पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनीं अस्मिता दोराजी

    जमशेदपुर (JAMSHEPUR):   31 मई 2022 को 38 वर्षीय अस्मिता दोराजी, जो टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन (टीएसएएफ) की एक वरिष्ट प्रशिक्षक है, जो सप्लिमेंट्री ऑक्सीजन का उपयोग किए बिना माउंट एवरेस्ट (8848 मीटर) के दक्षिण शिखर (8745 मीटर) तक पहुंचने में सफल रही. वह 13 मई 2022 को सुबह 6:30 बजे दक्षिण शिखर (8745 मीटर) से लौटी हैं, अविश्रवसनीय उपलब्धि को हासिल करने वाली वह पहली भारतीय महिला बनी गई. अस्मिता दोराजी को उनके अग्रणी प्रयास के लिए टाटा स्टील एडवेंचर फांउडेशन (टीएसएएफ) दूवारा प्रशिक्षित और समर्थित किया गया. बता दें कि उत्साहित अस्मिता दोराजी ने कहा कि वह निराश तो हैं लेकिन अपने प्रयास से संतुष्ट है. वह 3 वर्षों से शिखर पर चढ़ने के लिए प्रशिक्षण ले रही है, जहां बिना ऑक्सीजन के चढ़ने के प्रयास को ध्यान में रखते हुए, उसकी ताकत, धीरज और सहनशक्ति को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया गया था. 
     

    माउंट एवरेस्ट(8000 मीटर)तय पहली भारतीय माहिला
    8000 मीटर के निशाने से आगे का अभियान मार्ग, जिसे मृत्यु क्षेत्र भी कहा जाता है. दुनिया में बहुत कम लोग ही है, जिन्होंने बिना सप्लिमेंट्री ऑक्सीजन के माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई की है.बता दें कि कम घनत्व वाली हवा, तेज हवाओं और कड़ाके की ठंड के कारण बेहद खतरनाक माना जाता है. पर्वतारोहियों को जीवित रहने और सुरक्षित रुप से लौटने के लिए शिविर 3 यानि 7100 मीटर से उपर सप्लिमेंट्री ऑकेसीजन का उपयोग करने की आवश्यकता होती है.

    वह अपने प्रशिक्षण के अंग के रूप में 7000 मीटर और 6000 मीटर की विभिन्न चोटियों पर चढ़ चुकी है, साथ ही लंबी दूरी के लिए साईकिल चलाना और दौड़ना भी उनके प्रशिक्षण में शामिल है, उन्होंने ने उतरकाशी स्थित टीएसएएफ बेस कैंप जमशेदपुर के पास दलमा हिल्स के रास्तों में भी दौड़ने की खूब प्रैक्टिस की है, टीएसएएफ के अन्य एवरेस्टर्स के अनुभव और सीख ने भी उनकी तैयारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

    रिपोर्ट - रंजीत ओझा, जमशेदपुर.


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