फिसड्डी विकास : न सड़कें, ना पानी, ढ़िबरी युग में जी रहे झारखंड के ये गांव

    सिमडेगा (SIMDEGA) : जहां एक और देश आजादी का 75वां अमृत महोत्सव मना रहा है, वहीं जिले के दो गांव ऐसे हैं जहां के लोग गांव के मूलभूत सुविधाओं  से कोसों दूर हैं. इन गांवों में विकास जैसे सैंकड़ो साल फिसड्डी है. सांप और हाथियों के भय में शाम होते ही घर में दुबक जाते क्योंकि बिजली की व्यवस्था नहीं. दिन की शुरुआत पानी के लिए इंतजाम करते शुरू होती है. वहीं आवागमन के साधन ऐसे कि नजारा देख कर ही हमारा-आपका कलेजा कांप जाए.  गांव के सुदर्शन सिंह बताते हैं कि गांव में बिजली और पेयजल के नाम पर एक चापाकल और एक कुआं है. विकास के नाम पर मनरेगा द्वारा केवल प्रधानमंत्री आवास व मुरम पथ का निर्माण हुआ है. लोग ढिबरी युग में जीने को मजबूर हैं.

    जंगली इलाका और बिजली नदारद

    तमाम विकास के नजारे और दावों के बीच सिमडेगा जिले के कोलेबिरा प्रखंड मुख्यालय से महज 6 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित रैसिया पंचायत के पंडरीपानी गांव आज भी जिले से कटा हुआ है. गांव में पहुंचना है तो नदी में बने लकड़ी के  पुल पर जान जोखिम में डालकर गांव पहुंचा जा सकता है. कई बार बच्चे पुल पार करने के चक्कर में हादसे के शिकार हो चुके हैं.  गर्भवती महिला व बीमार व्यक्ति को पहुंचाने के लिए गेड़ूआ भार या खाट का सहारा लेना पड़ता है. क्षेत्र हाथी प्रभावित भी है और जंगली इलाका है. बिजली नहीं रहने से हाथियों के आतंक से भी भय बना रहता है. वहीं दूसरी ओर सांप वगैरह का भय बना रहता है.

    रास्ते ऐसे कि गुजरते हुए कलेजा कांपे

    यहां अस्थाई लकड़ी का जर्जर पुल ही आवागमन का साधन है. इस पुल से गुजरने के लिए मजबूत दिल चाहिए. इस पुल के नीचे से देवनदी की तेज धारा बहती है. इस गांव में 20 से 25 घर हैं जहां हरिजनों की आबादी है. जिले के इसी प्रखंड में इसी पंचायत के दशा टोली जाने वाले रास्ता में दो चट्टानों के बीच बिजली के 4 पोल रख दिए गए हैं जिससे आवागमन होता है. कई बार स्कूली बच्चे भी यहां गिरकर घायल हो चुके हैं. दडोली जाने वाले रास्ते भी जर्जर हैं. सड़क की स्थिति बदहाल है हम यह भी कह सकते हैं सड़क तो हैं ही नहीं. बरसाती मौसम में पुल पार करना किसी बड़े खतरे से कम नहीं है. इसी रास्ते से होकर बच्चे इसी पंचायत के उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय किनबिरा  स्कूल पढ़ने आते हैं. दुर्गम हालात और मूलभूत सुविधाओं  को लेकर  अधिकारी और जनप्रतिनिधि से भी कई ग्रामीणों ने गुहार लगाई है. पर कोई सुनवाई नहीं होती है.

    रिपोर्ट : अमित रंजन, सिमडेगा


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