दो दिवसीय साहित्य महोत्सव संपन्न, साहित्यकारों ने समझाया लाइब्रेरी ऑफ माय लाइफ का महत्व


दुमका (DUMKA) - दुमका के राजकीय पुस्तकालय में दो दिवसीय पुस्तक उत्सव का आयोजन किया गया. रविवार को इस दो दिवसीय आयोजन के अंतिम दिन चार सत्र में कार्यक्रम का आयोजन किया गया. राज्य में पुस्तकालय और पुस्तक के महत्व को बताने और जिले में शिक्षा के साथ साहित्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इसका आयोजन किया गया. दो दिनों तक चलने वाले इस साहित्य महोत्सव में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रख्यात साहित्यकारों का महाजुटान हुआ. इसमें देश के साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित नीलोत्पल मृणाल, अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त उपन्यासकार और समालोचक चंद्रहास चौधरी, अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथाकार और भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी रजत उभयकर, विख्यात पक्षी विज्ञानी और संरक्षणवादी विक्रम ग्रेवाल, वॉकिंग बुकफेयर के लेखक और सह-संस्थापक अक्षय बहिबाला, आदिवासी विचारक कवि और अभिनेता महादेव टोप्पो, कवि, लेखक और साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित अनुज लुगुन, प्रोफेसर अच्युत चेतन, कवि और लेखक बिनय सौरभ, लेखक और आलोचक रणेंद्र, सहायक प्रोफेसर यदुवंश प्रणय, प्रोफेसर अभिजीत गुप्ता, भारतीय अकादमिक, खाद्य समीक्षक और इतिहासकार पुष्पेश पंत, और अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लेखक मिहिर वत्स जैसे प्रसिद्ध साहित्यकार ने भाग लिया.
लाइब्रेरी ऑफ माय लाइफ
पहले दिन के कार्यक्रम को 7 सत्रों में बांटा गया. पहला सत्र लाइब्रेरी ऑफ माय लाइफ में सभी साहित्यकारों ने अपने जीवन में पुस्तकालय के महत्व और पुस्तकालय से जीवन में होने वाली परिवर्तन पर बात की. दुमका के युवा साहित्यकार निलोत्पल मृणाल ने कहा कि यह झारखंड राज्य में साहित्यिक रूप से घटित होने वाली सबसे बड़ी घटना है. उन्होंने कहा कि साहित्यिक रूप से इतना सफल आयोजन झारखंड में आज तक नहीं हुआ है.वहीं इस आयोजन पर प्रोफेसर अच्युत चेतन ने कहा कि बहुत ही सफल आयोजन है उन्होंने कहा कि आज के दौर में जो भी बड़े राइटर हुए हैं वह एक अच्छा पाठक जरूर हुए हैं उन्होंने पढा है इसलिए आज लिख रहे है.
किताबों के इतिहास पर चर्चा
उपराजधानी दुमका के राजकीय पुस्तकालय में प्रथम साहित्य उत्सव के दूसरे दिन रविवार को हिस्ट्री ऑफ बुक्स पर प्रो अभिजीत गुप्ता और प्रो अच्युत चेतन के सत्र किताबों के इतिहास पर चर्चा हुई.
रिपोर्ट : पंचम झा, दुमका
4+