1932 खतियान : संथाल के गांवों में मांग तेज, लोबिन ने फूंका बिगुल, सीएम सहित सभी सत्ताधारी विधायक-मंत्री का पुतला दहन

    1932 खतियान : संथाल के गांवों में मांग तेज, लोबिन ने फूंका बिगुल, सीएम सहित सभी सत्ताधारी विधायक-मंत्री का पुतला दहन

    दुमका(DUMKA): झामुमो द्वारा अपने चुनावी घोषणा पत्र में 1932 का खतियान लागू करने का भरोसा  देना आज सरकार के समक्ष गंभीर संकट उत्पन्न कर दिया है. बगावत का बिगुल कोई और नहीं बल्कि झामुमो के वरिष्ट विधायक लोबिन हेम्ब्रम ने फूंका है. समय समय पर सीएम की भाभी सीता सोरेन भी कई मुद्दों पर सरकार को आइना दिखाते रहती है. रविवार को अपने विधान सभा क्षेत्र बोरियो में विधायक लोबिन हेम्ब्रम ने जन आक्रोश रैली के माध्यम से अपनी मंशा स्पष्ट कर दिया है. जन आक्रोश रैली में संथाल परगना प्रमंडल के सभी 6 जिलों से उनके समर्थक पहुचे थे. प्रशासनिक स्तर पर ना तो सभा की अनुमति दी गयी और इसमें भाग लेने से रोकने के लिए भी सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता की गई थी.  इसके बाबजूद लोग स्थल पर पहुंचे और सभा हुई. जिसमें लोबिन हेम्ब्रम ने आंदोलन की रूप रेखा रखा.  

    कई विधायकों का पुतला दहन

    लोबिन की सभा के बाद 1932 खतियान रूपी आग दुमका के गांव गांव में लगने लगी है. उसी कड़ी में आज फूलो झानो मुर्मू 1932 खतियान संगठन और दिसोम मरांग बुरु युग जाहेर अखड़ा के बैनर तले दुमका प्रखंड के आधा दर्जन से भी अधिक गांव गारडी, भीखा, धोबनचिपा, मकरो, दुन्दिया, लेटो, विजयपुर आदि में ग्रामीणों द्वारा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और दुमका के विधायक बसंत सोरेन का पुतला दहन किया गया. इसके साथ साथ विधायक लोबिन हेम्ब्रोम को छोडकर सत्ता पक्ष झारखण्ड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस और राजद(राष्ट्रिय जनता दल) पार्टी के सभी विधायकों का पुतला दहन किया गया. ग्रामीणों का कहना है कि दुमका के साथ पुरे झारखण्ड में 1932 खतियान आधारित स्थानीय निति और नियोजन निति का आन्दोलन और मांग आदिवासी और मूलवासी कर रहे हैं. उसके बावजूद झारखण्ड सरकार इसे लागू नहीं कर रही है. जिससे नाराज और आक्रोशित ग्रामीणों ने पुतला दहन किया. संगठन और ग्रामीणों का कहना है कि हेमंत सोरेन सरकार निरंकुश हो गयी है.

    वर्तमान सरकार वादा खिलाफी कर रही

    03 अप्रैल को बोरियो में लोबिन हेम्ब्रोम के द्वारा आयोजित 1932 खतियान जन आक्रोश महासभा में छात्रों और लोगों को जाने से रोका जा रहा था. संगठन और ग्रामीणों का यह भी कहना है कि वर्तमान सरकार वादा खिलाफी कर रही है. चुनाव के समय यह वादा किया गया था कि सरकार बनने पर 100 यूनिट का बिजली मुफ्त में दिया जायेगा, लेकिन वादा के ठीक उल्टा 20/25 हजार रूपये का कई महीना का बिजली बिल आ रहा है. चुनावी वादा के हिसाब से सरकार बिजली बिल माफ करें. इसके साथ साथ पांच लाख युवाओं को नौकरी देने का वादा किया गया था. जो सिर्फ जुमला सिद्ध हो रही है.

    विधानसभा सत्र के दरमियान मुख्यमंत्री ने बयान में कहा है कि 1932 के खतियान आधारित नियोजन नीति नहीं बन सकती है और 5 लाख सरकारी नौकरी देने की वादा किया था लेकिन वादा को दरकिनार करके 5 लाख रोजगार देने की बात कर रहा है ! इस बयान से संगठन और ग्रामीण काफी नाराज और आक्रोशित है.

    इसके साथ संगठन और ग्रामीणों ने निम्नलिखित मांगे कर रहे है :

    (1) वर्तमान स्थानीय निति और नियोजन निति को रद्द कर 1932 खतियान आधारित स्थानीय नीति और नियोजन नीति बनाया  जाय

    (2) संताली को प्रथम राजकीय भाषा घोषित किया जाय

    (3) मगही,भोजपुरी,अंगिका  आदि बाहरी भाषाओ को क्षेत्रिय भाषाओ से पुरे झारखण्ड से हटाया जाय

    (4) राज्य में पेसा कानून को लागु किया जाय

    (5) SPT,CNT एक्ट को शक्ति से लागु किया जाय

    (6) ग्रामीणों के जन समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिय मुख्यमंत्री जन संवाद केंद्र को पुनः चालु किया जाय

    (7) सरकारी नौकरी अनुबंध और ठेका में देना बंद कर स्थायी नौकरी दिया जाय

    (8) सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय के छात्र समन्वय समिति के छात्रों और आंदोलनकरियो के ऊपर लगाए गए सरकार की भादवि की धारा 188  व DM एक्ट के तहत दर्ज प्राथमिकी अविलंब वापस लिया जाए

    (8)100 यूनिट बिजली मुफ्त दिया जाय.  

    अगर कोई नेता या राजनीतीक पार्टी मांगो का समर्थन नहीं करता है तो उस नेता और पार्टी का राजनितिक और सामजिक बहिष्कार किया जायेगा. इस मौके में कमलेश हांसदा,बिटिया किस्कु,लुखी टुडू,बियला टुडू,सुरय टुडू,कार्तिक मराण्डी, अनिल यादव,बहामुनि हेम्ब्रम,सुकोदि सोरेन,मंगल मुर्मू,धुनिराम मुर्मू,रामशंकर मिर्धा,प्रियंका सोरेन,पानसुरी मुर्मू,मंगल मरांडी,रूपलाल हांसदा,सार्जेंन सोरेन,रामेश्वर मुर्मू,परमेश्वर मरांडी,स्टेफन मरांडी,सुजीत सोरेन,श्याम लाल रॉय,धर्मेंद्र रॉय,तुलसी देवी,श्याम लाल रॉय के साथ काफी संख्या में महिला और पुरुष उपस्थित थे.

    रिपोर्ट: पंचम झा, दुमका



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