कैंसर पीड़ित लेखिका के कविता संग्रह “मेरी उम्मीद की ओर” का विधायक ने क‍िया विमोचन

    कैंसर पीड़ित लेखिका के कविता संग्रह “मेरी उम्मीद की ओर” का विधायक ने क‍िया विमोचन

    जमशेदपुर(JAMSHEDPUR): मजबूत इरादे हों और जिंदगी के प्रति सकारात्मक रवैया तो विपरीत हालातों में भी इंसान निराश होने की बजाए सृजन कर सकता है. इसका जीता जागता उदाहरण हैं उभरती लेखिका कुमारी छाया. कैंसर जैसी बीमारी से जूझ रही कुमारी छाया ने हिम्मत न हारते हुए लेखन के क्षेत्र में कदम रखा है. पिछले साल जहां उनकी पहली किताब 'एक प्याली चाय' लोगों को खूब भाई. वहीं इस साल वे अपनी दूसरी पुस्तक "मेरी उम्मीद की ओर" लेकर आईं हैं. जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने शनिवार की देर शाम इस किताब का विमोचन किया. पेशे से शिक्षिका कुमारी छाया का यह दूसरा कविता संग्रह है.

    पुस्‍तक में प्रकृत‍ि के रंग दिखते हैं: सरयू राय

    विमोचन के मौके पर सरयू राय ने पुस्‍तक में छपी कव‍िताओं की सराहना की और कहा क‍ि पुस्‍तक का शीर्षक ही बताता है क‍ि इसमें क्‍या है. उन्‍होंने कहा क‍ि इस पुस्‍तक में प्रकृत‍ि के रंग दिखते हैं. साथ ही यह संदेश है क‍ि व‍िश्‍वास से चलें तो जीवन की दुश्‍वार‍ियां समाप्त हो जाती हैं और जीवन सरल हो जाता है. राय ने लेख‍िका के जज्‍बे को सराहा और कहा क‍ि कैंसर जैसी बीमारी से जूझते हुए रचनाधर्म‍िता का नि‍र्वहन काबिले तारीफ है. मुझे पुस्‍तक इसलिए भी पसंद आयी कि मुश्किल से चार-छह पंक्तियों में ही लेख‍िका अपनी बातें कहकर दूसरे पन्ने की ओर बढ़ जाती है. ऐसे में पुस्तक में बोझिलता का एहसास नहीं होता.

    लेखिका की है दूसरी किताब

    इस मौके लेख‍िका कुमारी छाया ने कहा क‍ि पि‍छले वर्ष पहली पुस्‍तक “एक प्‍याली चाय” प्रकाशि‍त हुई थी. “मेरी उम्मीद की ओर” उनकी दूसरी पुस्‍तक है. इसकी कविताएं नकारात्‍मकता से न‍िकलकर सकारात्‍मकता की ओर बढ़ने का संदेश देती हैं. हमेशा सकारात्‍मक सोचें और परेशानी से मत घबराएं. उनकी कव‍िताएं उम्‍मीद जगानेवाली हैं. उन्‍होंने कहा क‍ि मुझे प्रकृति से लगाव है और जब मैं प्रकृति के पास होती हूं तो जीवन के सुंदर रूप को अपलक निहारते रहती हूं. सौ पेज की इस कविता संग्रह को लोगों को जरूर पढ़नी चाहिए.

    रिपोर्ट: अन्नी अमृता, ब्यूरो हेड(जमशेदपुर)

     



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