EXCLUSIVE : राजेंद्र बाबू के बेटे विधायक अनूप सिंह की मौजूदगी में कल  इतिहास हो जाएगा  राकोमसंघ(राजेंद्र गुट ) का नाम !

    EXCLUSIVE : राजेंद्र बाबू के बेटे विधायक अनूप सिंह की मौजूदगी में कल  इतिहास हो जाएगा  राकोमसंघ(राजेंद्र गुट ) का नाम !

    धनबाद (DHANBAD) : एक समय था जब कोयलांचल  में राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ (राकोमसंघ) की अनुमति के बिना पत्ता नहीं खड़कता था. बीपी सिन्हा, रामनारायण शर्मा, पंडित बिंदेश्वरी दुबे,कांति मेहता, एस दासगुप्ता, दामोदर पांडेय, सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह, एसके राय ,राजेंद्र प्रसाद सिंह जैसे लोग  इसकी  अगुवाई करते थे.  सदस्यता इतनी अधिक थी कि  दूसरे यूनियन वाले चू चापड़  करने की हिम्मत नहीं करते थे. लेकिन गुटों में बंटने  के कारण गौरवशाली अतीत वाली यह यूनियन दिन प्रतिदिन कमजोर होती गई. सूत्रों के अनुसार शुक्रवार की बैठक में संघ का नाम बदलने की पूरी तैयारी  की गई है.    

    अभी कुल चार गुट अलग अलग कर रहे हैं काम 

    जानकारों की माने तो संघ में अभी 4 गुट काम कर रहे हैं जैसे  राजेंद्र गुट, ददई गुट, ललन  गुट  और त्रिपाठी गुट.  इस यूनियन की अहमियत इतनी कमजोर हो गई है कि ट्रेड यूनियन रजिस्टरार  के आदेश पर जेबीसीसीआई की बैठक में दो बार से कोई भी प्रतिनिधि शामिल नहीं हो पा रहा है.  जैसी की जानकारी मिल रही है कल रविवार को टाटा स्टील महाप्रबंधक कार्यालय के सभागार में राजेंद्र गुट  की वर्किंग कमेटी की बैठक है, इस बैठक में कयास लगाए जा रहे हैं कि राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ, राजेंद्र गट का  नाम बदलकर राष्ट्रीय कोलियरी  मजदूर यूनियन रख दिया जाएगा. 

    बैठक में राजेंद्र बाबू के पुत्र विधायक अनूप सिंह भी रहेंगे

    बैठक में राजेंद्र बाबू के पुत्र विधायक अनूप सिंह भी रहेंगे.  हालांकि आज बात करने पर इंटक नेता एके झा ने इसे अफवाह बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि कल केवल वर्किंग कमेटी की बैठक होगी, जिसमें यूनियन को मजबूत करने का निर्णय लिया जाएगा. बता दें कि एक जमाने में राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ का सेल ,टाटा, बीसीसीएल, सीसीएल, ईसीएल आदि कंपनियों में तूती बोलती थी.  बीपी सिन्हा ,पंडित बिंदेश्वरी  दुबे ,रामनारायण शर्मा, कांति मेहता ,एस दासगुप्ता, दामोदर पांडे आदि ने मिलकर 1970 के आसपास  में धनबाद के जॉन स्मृति भवन में संघ का कार्यालय खोला. 

    कोयला उद्योग के राष्ट्रीयकरण में संघ की थी बड़ी भूमिका 

     इन्हीं नेताओं ने  प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी को कोयला मजदूरों पर जुल्म की कहानी बताई तो उससे प्रभावित होकर उन्होंने कोयला उद्योग के  राष्ट्रीयकरण का निर्णय लिया था.  नाम बदलने और और 'यूथ विंग' की सोच का असर क्या होगा. यह तो आने वाला समय ही बताएगा.  बहरहाल कल की वर्किंग कमिटी की बैठक पर  कम से कम स्थानीय नेताओं की टकटकी लगी हुई है. 



    Related News