success story : गुड़ियों ने बदल दी जिंदगी, अब हैं ये भी इंडिपेंडेंट
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देवघर (DEOGHAR) - देवघर के ग्रामीण क्षेत्र में महिलाएं खिलौना बना कर आत्मनिर्भर बन रही हैं. स्वयं सहायता समूह के जरिए खिलौना बना कर महिलाएं इसे बेच रही हैं और घर बैठे अच्छी कमाई कर रही हैं. अच्छी बात है कि इनके द्वारा निर्मित खिलौना पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी अनुकूल है.
अपने पैरों पर खड़ी हो रही ग्रामीण महिलाएं
खिलौना में विदेशी बाजार का वर्चस्व को समाप्त करने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा जब से खिलौना निर्माण को एक उद्योग के रूप में विकसित करने का आह्वान किया गया था, तब से देवघर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं इसी तर्ज पर घर में खिलौना बना कर अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं. खिलौना बनाने का प्रशिक्षण लेकर ये महिलाएं टेडी वियर, गुड़िया से लेकर कई बेहतरीन खिलौने बना रही हैं. इनके अनुसार इनके पास पहले कोई काम नहीं होता था, लेकिन स्वयं सहायता समूह बना कर इनके द्वारा खिलौना बनाने का काम शुरू किया गया. रंग-बिरंगे आकर्षक लगने वाले ये खिलौने बना कर अब ये महिलाएं घर बैठे अच्छी कमाई कर ले रही हैं.
उत्पाद की बिक्री के लिए एक प्लेटफॉर्म एक बड़ी समस्या
गांव में निर्मित खिलौनों को बाजार उपलब्ध कराना सबसे बड़ी समस्या होती है. इसमें झारखंड आजीविका मिशन के द्वारा इन्हें पूरी मदद की जा रही है. इनके सहयोग से गांव में निर्मित खिलौने कई दूसरे जिला और राज्यों में भेजे जा रहे हैं जहां से इन्हें इनके खिलौने की अच्छी कीमत मिल जाती है. खुद जिला के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए तत्पर है. इनकी माने तो महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पाद बिक्री के लिए एक प्लेटफॉर्म उपलब्ध करवा कर इन्हें आत्मनिर्भर बनाना है. इससे विदेशी बाजार के वर्चस्व समाप्त किया जा सकता है.
वोकल फ़ॉर लोकल की तर्ज पर प्रोत्साहन
खिलौना बना कर ये महिलाएं तेजी से आत्मनिर्भर बन रही हैं. वोकल फ़ॉर लोकल की तर्ज पर अगर इन्हें स्थानीय स्तर पर और अत्यधिक प्रोत्साहित किया जाय तो वो दिन दूर नहीं जब खिलौना बनाने का यह घरेलू धंधा एक बड़े उद्योग की शक्ल अख्तियार कर लेगा और विदेशी बाजार की जगह घरेलू निर्मित खिलोने से बाजार पट जाएगा.
रिपोर्ट : रितुराज सिन्हा, देवघर
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