यूक्रेन से लौटी धनबाद की सौम्या, बताए वहां के हालात, माता-पिता हुए विचलित

    यूक्रेन से लौटी धनबाद की सौम्या, बताए वहां के हालात, माता-पिता हुए विचलित

    धनबाद(DHANBAD)- रूस और यूक्रेन के बीच चल रही लड़ाई में फंसी धनबाद बरटांड़ पंडित क्लीनिक रोड की रहने वाली सौम्या हेजल टोपनो अपने घर पहुंच गई है. घर पहुंचते ही माता- पिता और परिजनों की पीड़ा, खुशी के आंसू के रूप में छलक पड़े. बेटी भी अपने को परिवार के बीच पाकर बेहद खुश थी. बता दें कि सौम्या रोमानिया में फंसी हुई थी. वह मेडिकल की थर्ड ईयर की छात्रा है.  2019 में उसने यूक्रेन की राजधानी से लगभग 300 किलोमीटर दूर विनेटसिया मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में एडमिशन लिया था. सौम्या के पिता के पॉल टोपनो धनबाद रेल मंडल (चंद्रपुरा)में रेल कर्मचारी है.

    लोग बहुत मर रहे हैं, युद्ध को रुकना चाहिए

    सौम्या घर तो आ गई है लेकिन अभी भी यूक्रेन में रहने वाले अपने साथियों के लिए जार-जार आंसू बहा रही है. उसका कहना है कि लोग बहुत मर रहे हैं. युद्ध को रुकना चाहिए, मानवता की यही पुकार है. वैसे वह अपने वतन वापसी की जो कहानी बताती है. वह रोंगटे खड़े कर देने वाली है.  उसने कहा कि लगभग 10 किलोमीटर चल नहीं, दौड़ कर वह और उसके साथी ही बॉर्डर तक पहुंचे और उसके बाद एयर इंडिया के विमान से दिल्ली होते हुए रांची और फिर धनबाद पहुंचे है. कहा कि भारत सरकार जो भी मदद कर रही है, वह बॉर्डर के बाहर से ही, भीतर तो छात्रों को खुद संघर्ष करना पड़ रहा है. 

    देश के बाहर तिरंगा ही है, सबका सुरक्षा कवच

    मेडिकल छात्रा सौम्या का कहना है कि देश के बाहर तिरंगा ही है, जो सबकी रक्षा करता है. हम चाहे जितना भी देश - प्रदेश में  भाषा, जाति और धर्म के लिए लड़ लें लेकिन जब देश के बाहर होते हैं तो सिर्फ भारतीय(Indian) होते हैं और तिरंगा ही सहारा होता है. लेकिन फैसला ऐसा जरूर होना चाहिए जिससे यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों को नुकसान नहीं हो. सौम्या की माता जसमनी टोपनो का कहना है कि बेटी के लौट आने से हमें सब कुछ मिल गया है. वहीं सौम्या के पिता पॉल टोपनो का कहना है कि बेटी तो सकुशल घर आ गई है लेकिन अब भारत सरकार के निर्णय पर ही बच्चों का भविष्य निर्भर करता है. बिटिया तो अभी भी यूक्रेन में ही मेडिकल पढ़ाई पूरा करना चाहती है. सच्चाई ये भी है कि हम लोग जैसे मध्यमवर्गीय परिवार के लिए यूक्रेन में पढ़ाना सस्ता पड़ता है. मेडिकल पढ़ाई का खर्चा मात्र 20 -25 लाख लगता है. जो कि हम लोगों के अनुकूल है. वैसे भारत सरकार को विकल्प निकालने पर विचार जरूर करेगी.

    रिपोर्ट :अभिषेक कुमार सिंह ,ब्यूरो हेड ,धनबाद


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