तसर के उत्पाद को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की है आवश्यकता - उपायुक्त


दुमका (DUMKA) – दुमका जिला के साथ साथ पूरे संथाल परगना प्रमंडल में तसर से संबंधित रोजगार की अपार संभावनाएं हैं. सभी को एक साथ मिलकर काम करने की जरूरत है. आपके द्वारा बनाये जा रहे तसर के उत्पाद को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की आवश्यकता है और योजनबद्ध तरीके से इस दिशा में कार्य करने की जरूरत है. ये बातें उपायुक्त रविशंकर शुक्ला ने शुक्रवार को कही. वे इंडोर स्टेडियम दुमका में उद्योग विभाग के हस्तकरघा रेशम और हस्तशिल्प निदेशालय के तहत रेशम उत्पादकों के एक दिवसीय प्रमण्डलस्तरीय कार्यशाला के दौरान संबोधित कर रहे थे.
"मॉल और दुकानों में मिले ये उत्पाद"
उपायुक्त ने कहा कि शिल्पकारों द्वारा निर्मित उत्पादों का व्यापक प्रचार प्रसार किया जाएगा. ताकि अन्तराष्ट्रीय स्तर पर उत्पादों की मांग बढ़े और इससे जुड़े लोगों की आय में वृद्धि भी हो सके. आगे उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक लोगों को तसर उत्पादन से जोड़ने का काम किया जाना चाहिए और पहले से जुड़े लोगों को बेहतर ढंग से प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए. ताकि वे अपनी आय को बढ़ाने की दिशा में कार्य कर सकें. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि तसर उत्पादों की मार्केटिंग के लिए शहर के मुख्य स्थलों को चिन्हित करते हुए दुकान खोले जाएं और उत्पादों की बिक्री की जाय. साथ ही प्रमुख मॉल और दुकानों में भी यहां के सिल्क के उत्पाद उपलब्ध रहें. विशेष कर महिलाएं इस रोजगार से जुड़कर बेहतर आमदनी कर सकती है. नारगंज बड़ाचपुडिया जैसे सुदूरवर्ती क्षेत्रों के लोगों द्वारा निर्मित उत्पाद बाजार में उपलब्ध हो इसे सुनिश्चित करना है.
तसर उत्पादन की अपार संभावनाएं
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित एसएसबी के कमांडेंट ने अपने संबोधन में कहा कि दुमका जिले में तसर उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं. तसर संथाल परगना की एक बड़ी पूंजी है जो देश में ही नहीं पूरे विश्व में अपनी पहचान बना सकती है. इसके लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा. तसर उत्पादन को लेकर दुमका जिला की अपनी एक अलग पहचान है. सभी का योगदान रहे तो इस ख्याति को और भी आगे बढ़ाया जा सकता है.
तसर उत्पाद जिला को दिला सकती है पहचान
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित वन प्रमंडल पदाधिकारी ने कहा कि वन और तसर का एक मजबूत रिश्ता है और इससे इंकार भी नहीं किया जा सकता. उन्होंने आगे कहा कि वन विभाग और रेशम विभाग अगर मिलकर कार्य करें तो तसर सिल्क और मयूराक्षी सिल्क के उत्पाद को बढ़ा सकते हैं. व्यवस्थित तरीके से कार्य किया जाय तो निश्चित रूप से तसर उत्पाद बढ़ेगा और जिले को एक नई पहचान मिलेगा.
देश-विदेशों में है रेशम के उत्पाद की मांग
कार्यक्रम में उपस्थित वैज्ञानिक डॉ शांताकार गिरी ने कहा कि रेशम किसी पहचान मोहताज नहीं है. रेशम से बने उत्पाद की मांग देश ही नहीं विदेशों में भी है।दुमका जिला के साथ साथ पूरा संथाल परगना प्रमंडल तसर उत्पादन में अपनी एक पहचान रखता है. उन्होंने कहा कि रेशम का धागा में सभी गुण मौजूद हैं. यह धागा जितना चमकीला होता है उतना ही लचीला होता है. वन से हर भरा प्रदेश होने के कारण यहां तसर का उत्पादन बहुत आसानी से किया जा सकता है.
अतिथियों को किया गया सम्मानित
स्वागत संबोधन सहायक उद्योग निदेशक रेशम अरुण नारायण जायसवाल ने दिया. कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त द्वारा सहायक उद्योग निदेशक को सम्मानित किया गया. इससे पहले सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह और अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया. उपायुक्त औऱ विशिष्ट अतिथियों के द्वारा 4 रेशम उत्पादकों को प्रशस्ति पत्र एवं उपहार देकर सम्मानित किया गया. साथ ही विभागीय कर्मियों को भी इस दौरान सम्मानित किया गया. दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का विधिवत रूप से शुरुआत किया गया एवं पारंपरिक रीति रिवाज लोटा पानी से अतिथियों का स्वागत किया गया.
रिपोर्ट : पंचम झा, दुमका
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