केबुल कंपनी पर सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला, अब राज्य सरकार पुनर्जीवित करे - सरयू राय

    केबुल कंपनी पर सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला, अब राज्य सरकार पुनर्जीवित करे - सरयू राय

    जमशेदपुर(JAMSHEDPUR)- विधायक सरयू राय ने बंद पड़ी केबुल कंपनी के मामले पर सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने कंपनी को पुनर्जीवित के लिए अब झारखंड सरकार को पहल करने की सलाह दी है. क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी को नीलाम करने के एनसीएलटी के पूर्व के आदेश को निरस्त कर दिया है.

    क्या कहा सरयू राय ने

    सर्वोच्च न्यायालय ने केबुल कंपनी (इंकैब) के मुकदमे पर आज एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है, जिसका दूरगामी प्रभाव होगा. सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश से एनसीएलटी द्वारा पूर्व में पारित किया गया कंपनी को नीलाम करने वाला आदेश निरस्त हो गया है. कंपनी को बेचने के लिए विज्ञापित किया गया प्रस्ताव भी निरर्थक हो गया है और कंपनी को नये सिरे से पुनर्जीवित करने और इसकी परिसंपत्तियों को राज्य हित में उपयोग करने का रास्ता खुल गया है. सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय से हमलोगों की बात सही साबित हो गयी है कि इसके पूर्व के प्रबंधन की बेईमानी और बदइंतजामी के कारण कंपनी रुग्ण हो गयी और नीलामी के कगार पर पहुंच गयी. मैंने दो बार गोलमुरी थाना में इस आशय की प्राथमिकी दर्ज किया कि इंकैब की परिसंपत्तियो की चोरी प्रबंधन की मिलीभगत और लापरवाही के कारण की जा रही है. परंतु इस बारे में पुलिस ने अबतक कोई कारवाई नहीं किया है.

    सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय के आलोक में मैं फिर से राज्य सरकार से आग्रह करूंगा कि वह इसमें हस्तक्षेप करे और शेष परिसंपत्तियों एवं 177 एकड़ जमीन के आधार पर यहां औद्योगीकरण का नया ढांचा खड़ा करे. सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय को एनसीएलटी द्वारा कंपनी को नीलामी पर चढ़ाने का निर्णय भी निरस्त हो गया है. अब इसका प्रबंधक के समूह को बताना पड़ेगा कि कंपनी के ऊपर कुल देनदारी को उन्होंने 21 करोड़ से बढ़ा कर 2339 करोड़ रुपया कैसे कर दिया? देश में बदइंतजामी और प्रबंधकों की मिलीभगत के कारण एक सक्षम कंपनी के रुग्ण हो जाने और नीलामी के कगार पर पहुंच जाने का यह एक अनोखा उदाहरण है. सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय मजदूरों के हित में है और मजदूरों के हित की रक्षा करने के लिए राज्य की सरकार को आगे आना होगा. सरकार ने ऐसा नहीं किया तो हमें इसके लिए संघर्ष करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा.

    रिपोर्ट: अन्नी अमृता, ब्यूरो हेड, जमशेदपुर


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