“बाहरी भाषा झारखंड में नाय चलतो, नाय चलतो, नाय चलतो..."

    “बाहरी भाषा झारखंड में नाय चलतो, नाय चलतो, नाय चलतो..."

    बोकारो (BOKARO) – “बाहरी भाषा झारखंड में नाय चलतो, नाय चलतो, नाय चलतो, बाहरी भाषा के झारखंड से भगवे होतो ओर 1932 के खतियान लागू कर नियोजन नीति बनवे होतो”. उक्त बातें गोमिया विधायक डॉ लंबोदर महतो ने पेटरवार स्थित अपने आवासीय कार्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से कही.

    विधायक का बयान

    मौके पर उन्होंने कहा कि पूरा राज्य भाषायी आंदोलन में धधक रहा है. खास कर बोकारो, धनबाद सहित राज्य के अन्य जिलों में बाहरी भाषा को थोपे जाने पर राज्य की जनता सड़क पर उतरने के लिए बाध्य हो गई है.  कहा कि अगर राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन क्षेत्रीय भाषा में शामिल किए गए भोजपुरी, मगही, मैथिली और अंगिका को 6 मार्च तक निरस्त नहीं करती है तो सात मार्च से आजसू पार्टी विधानसभा में धरना देने के लिए बाध्य हो जाएगी. प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने बताया कि बाहरी भाषा को झारखंड से भगाने के लिए मूलवासी खोरठा दिवस से ही आंदोलन चला रही है और यह आंदोलन तब तक चलाया जाएगा जब तक इन बाहरी भाषाओं को मुख्यमंत्री के द्वारा नहीं हटाया जाता है. इन बाहरी भाषा को झारखंड से भगाने के लिए सड़क से सदन तक जोरदार आंदोलन चलाया जाएगा.

    रिपोर्ट : संजय कुमार, बोकारो (गोमिया)


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