निरसा में मरने वाले कोयला चोर नहीं थे, मुआवजा दे सरकार - दीपंकर


धनबाद (DHANBAD) : भाकपा (माले) के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने चॉल धंसने के मामले को लेकर धनबाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद घटनास्थल का (निरसा क्षेत्र) का दौरा किया. उन्होंने घटना में अपनी जान गंवाने वालों की संख्या 15 बताया और कहा कि यह जानकारी उन्हें स्थानीय लोगों ने ही दी है. वहीं माले महासचिव ने कहा कि मरने वालों को कोयला चोर कहना कतई सही नहीं है. यह लोग अगल-बगल गांव के ही हैं और रोजगार की तलाश में कोयला चुनने का काम करते हैं.
मुआवजे की मांग
दीपंकर भट्टाचार्य ने सरकार को मरने वालों के परिवार को मुआवजा देने की मांग की है. उन्होंने कहा कि सरकार कोयला क्षेत्र के निजीकरण का प्रयास कर रही है, उसके बदले सरकार को खुद खनन का काम करना चाहिए और अगल-बगल के लोगों को रोजगार देना चाहिए. जमीन उनकी है तो रोजगार का पहला हक भी उन्हीं को मिलना चाहिए. उन्होंने भाकपा के महासचिव ने मोदी सरकार के द्वारा हाल ही में पेश किए गए आम बजट को जनविरोधी और किसान विरोधी बताते हुए कहा कि इसमें एमएससी लागू करने का कोई जिक्र नहीं किया गया है.
कोयला चोर नहीं, पेट की आग बुझाने के लिए कोयला चुनने जाते थे लोग
बगोदर के पूर्व विधायक विनोद सिंह ने कहा कि निरसा में मरने वाले कोयला चोर नहीं थे. रोजी-रोटी के लिए कोयला चुनने का काम करते थे. उनके पास कोई रोजगार का साधन नहीं था. वर्तमान हेमंत सरकार बेरोजगारों की बदौलत आई थी. लगा था कि कुछ बेरोजगारों का भला हो जाएगा, गरीबों को रोजी-रोटी मिलेगी लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ और न हो रहा है. वहीं स्थानीय नीति को परिभाषित कर बेरोजगारों को रोज़गार मिलना चाहिए. लेकिन दो साल बीतने के बाद भी सरकार मौन है. बता दें कि निरसा में मंगलवार को चाल धंसने की घटने हुई थी, जहां प्रशासन के अनुसार पांच लोगों की मौत हुई थी. जबकि विभिन्न पार्टी अलग-अलग दावा कर रहे हैं. वहीं प्रशासन मामले की SIT जांच करा रही है.
रिपोर्ट : अभिषेक कुमार सिंह, ब्यूरो हेड, धनबाद
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