चारों ओर कड़ाके की ठंड, फिर भी सड़क पर रहने को मजबूर हैं लोग, कौन सुनेगा इनका दर्द

    चारों ओर कड़ाके की ठंड, फिर भी सड़क पर रहने को मजबूर हैं लोग,  कौन सुनेगा इनका दर्द

    लोहरदगा(LOHARDAGA)- लोहरदगा में पड़ रही कड़ाके की ठंड में जहां लोग शाम होते ही अपने घरों में दुबक जाते हैं वहीं  ऐसे भी लोग हैं जो खुले आसमान के नीचे इस कड़ाके की ठंड में रात गुजारने को मजबूर हैं , इन्हें ना ही कंबल मिला है और ना ही इन्हें रैन बसेरा का लाभ मिल रहा है.

    जानें पूरी कहानी 
    बारिश के बाद बढ़ी ठंड ने लोगों को शाम होते ही अपने घर में कैद कर देने का कार्य कर रही है, ठंड ऐसी कि पानी भी बर्फ बन जाए, लेकिन लोहरदगा में कुछ ऐसे भी लोग हैं जो NH मुख्य सड़क के किनारे बुझती हुई आग का सहारे रात गुजारने को मजबूर हैं.  इस तरह से रात गुजारने में दुर्घटना का हमेशा भय बना रहता है, पहले तेज गति से आ रही सड़क पर की ये वाहनें कहीं सो रहे इस महिला को अपने चपेट में ना ले ले. और दूसरी यह कि यह जिस आग के सहारे रात गुजार रही है कहीं वह आग इसे अपनी चपेट में न लें ले.
    खुले आसमान के नीचे सो रही इस महिला को ना तो रैन बसेरा का पता है और ना ही इसे अभी तक कंबल का लाभ मिला है.. सड़क के किनारे बची खुची आग की गर्मी से यह ठंड को दूर करने की कोशिश कर रही है. लेकिन कहा जाए तो यह सिस्टम का दुर्भाग्य है कि ऐसी महिला सड़क के किनारे खुले आसमान के नीचे में सोने को मजबूर है जहां चारों ओर कई तरह की दुराचार की घटनाएं सामने आ रही हैं. ऐसे में इस महिला को खुलेआम सड़क के किनारे सोना सिस्टम पर तमाचा है हालांकि कार्य नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी का कहना है कि रैन बसेरा में सारी सुविधाएं उपलब्ध है जो भी लोग जिनका अपना छत नहीं है वह कचहरी मोड़ स्थित रैन बसेरा में आकर रात गुजार सकते हैं, और इस दिशा में सुविधा प्रदान करने का भी कार्य किया जा रहा है.  लोहरदगा शहरी क्षेत्र के सुभाष चौक पर सड़क के किनारे  महिला कुछ यूं हालात में रात गुजारने को मजबूर है, महिला कहां से आई कहां की है और क्या करती है ये पता पाने में असमर्थ है, वही सड़क के किनारे की सभी दुकानें बंद हैं और ठंड ने लोगों को कैद कर रखा है.
    रिपोर्ट:  गौतम लेनिन, लोहरदगा


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