पलामू में किसानों के साथ छल, धान खरीद में 43 करोड़ 20 लाख का घोटाला !

    पलामू (PALAMU) :  पलामू में धान क्रय केंद्र पर किसानों से बैग और सुखवान के नाम पर पैसे की उगाही हो रही है. इससे किसानों को घाटा हो रहा है. ऐसे में किसान परेशान होकर अपना धान क्रय केंद्र पर न देकर बाहर बेचने को मजबूर हैं. बैग के नाम पर करोड़ों रुपए एजेंसी के झोले में जा रहे हैं. किसानों ने सरकार से मामले की जांच कर दोषी एजेंसी पर कार्रवाई की मांग की है.         

    केंद्र ने बोनस बढ़ाया, राज्य ने घटाया

     केंद्र सरकार ने प्रति क्विन्टल धान पर 70 रुपए बोनस की बढोतरी की है.  इसके अनुसार प्रति क्विन्टल धान की कीमत 2120 रुपए होनी चाहिए थी. मगर एक तरफ केंद्र ने 70 रुपए बढाया तो दूसरी तरफ राज्य ने पूर्व के निर्धारित दर में 70 रुपए प्रति क्विन्टल की कमी कर दी. इससे कीमत पहले की तरह 2050 रुपए प्रति क्विन्टल ही किसानों को मिल रहा है.  

    बैग पर 33 और सुखवन पर 100 रुपए घाटा 

    प्रति क्विन्टल किसानों  का बैग पर 33 रुपए और सुखवन पर 100 रुपए घाटा हो रहा है. सरकार का प्रावधान है  कि किसानों को एजेंसी बैग उपलब्ध कराएगी. मगर पैक्स में किसानों से बैग का पैसा वसूल किया जा रहा है. वहीं एजेंसी को मजदूर की भी व्यवस्था करनी है. मगर इसका भी पैसा किसानों को देना पड़ रहा है.  इस स्थिति में किसान धान क्रय केंद्र को अपना धान न देकर बाहर बेचने को मजबूर हैं.

    43 करोड़ 20 लाख रुपए का घोटाला

    राज्य में आठ मैट्रिक टन मतलब 80 लाख क्विन्टल में 160 लाख बोरे की जरुरत होगी.  160 लाख बोरा नोडल एजेंसी झारखंड राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम लिमिटेड किसानों को उपलब्ध कराएगी. मगर धान खरीद के समय किसानों से ही बोरा उपलब्ध कराया जा रहा है. अगर इसे राज्य से परिपेक्ष्य में देखा जाए तो प्रति बोरा की निर्धारित कीमत 27 रुपए के हिसाब से 160 लाख बोरों की कीमत 43 करोड़ 20 लाख रुपए का वारा न्यारा हो रहा है.

    क्या है प्रावधान

    सरकार के संकल्प संख्या 2754 दिनांक 27.10.2021 के मुताबिक वर्तमान वित्तीय वर्ष में राज्य के लिए धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य आठ लाख मैट्रिक टन निर्धारित किया गया है. धान पैकिंग के लिए बोरों की व्यवस्था भारत सरकार के मानक के अनुसार अधिप्राप्ति एजेंसी के द्वारा की जानी है. अधिप्राप्ति केंद्रों पर नमी मापक यंत्र, विषलेषन किट, डिजिटल वेइंग मशीन एवं अन्य आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था भी अधिप्राप्ति एजेंसी को ही करने का प्रावधान है. साथ ही एजेंसी के माध्यम से मजदूरों की सुविधा भी उपलब्ध कराई जानी है.  किसानों से क्रय किए गए धान के मूल्य का भुगतान पीएफएमएस के माध्यम से सीधे किसानो के बैंक खाते में किया जाना है. राज्य जिला एवं प्रखंड स्तर पर योजना के पर्यवेक्षण व अनुश्रवण के लिए धान अधिप्राप्ति अनुश्रवण समिति का गठन किया गया है.

    किसानों में सरकार के प्रति नाराजगी

    प्रतिष्ठित किसान पूर्व मुखिया अबु नसर सिद्दीकी ने सरकार के द्वारा धान खरीद में बड़े घोटाले का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि सरकार ने किसानों का धान पैक्स के माध्यम से बेचने का प्रावधान किया है. मगर सरकार का प्रावधान सिर्फ संकल्प पत्र तक ही सीमित रह  गया है. सरकार ने बोनस में कटौती कर किसानों के साथ छल किया है. उन्होंने कहा कि सुखवान और बैग के नाम पर एजेंसी बड़े घोटाले कर रही है. मगर सरकार मौन है. 

    रिपोर्ट : समीर हुसैन (रांची डेस्क )


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