सरकार के कद्दावर विधायक लोबिन हैम्बरम आख़िर क्यों बैठ गए थाने में.. क्या है माजरा ?

    सरकार के  कद्दावर विधायक लोबिन हैम्बरम आख़िर क्यों  बैठ गए थाने में..  क्या है माजरा ?

    दुमका (DUMKA) राज्य पुलिस की कार्यशैली सवाल के घेरे में है. आलम यह है कि शुक्रवार को सरकार के कद्दावर विधायक लोबिन हेंब्रम को थाने के रवैय्ये से हार कर धरने पर बैठना पड़ा. पुलिस की यह छवि सरकार के लिए बहुत सुखद नहीं कही जा सकती.

    क्या है मामला

    दुमका नगर थाना क्षेत्र के राखाबनी मोहल्ला में एक आदिवासी लड़की किराए के मकान में रहती थी. मकान मालिक से किसी बात को लेकर उसकी तकरार हो गयी. 24 नवंबर को मकान मालिक ने उस लड़की के साथ मारपीट की. न्याय की आस में पीड़िता  तत्काल नगर थाना गई. सुनवाई नहीं होने पर फिर एक महीने से महिला थाना, SC ST थाना, DC तक आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाती रही. एक महीने बाद आज 24 दिसंबर को अनुसूचित जाति जनजाति अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण समिति के सभापति लोबिन हेंब्रम दुमका पहुंचे. पीड़िता ने लोबिन हेंब्रम को वस्तुस्थिति की जानकारी दी. एक आदिवासी लड़की को 1 महीने से न्याय नहीं मिलने की बात जानकर लोबिन हेंब्रम नाराज हो गए. पुलिस पदाधिकारियों को फोन पर जमकर क्लास लगाई. इससे भी बात नहीं बनी तो उसके बाद पीड़िता के साथ में नगर थाना परिसर में धरना पर बैठ गए.

    कई बार हुए अपनी सरकार के खिलाफ

    बता दें कि लोबिन हेंब्रम कई मसलों पर अपनी ही सरकार को घेरते नजर आते हैं. विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान सीएम हेमंत सोरेन के छत्तीसगढ़ मॉडल को अपनाकर शराब बेचने के बयान पर जम कर निशाना साधा था. शिबूसोरेन की नशा से दूर रहने की नसीहत का हवाला देते हुए एलान कर दिया था कि ऐसा हर्गिज नहीं होने देंगे. इससे पूर्व आंगनबाड़ी सेविका सहायका की नियुक्ति मामले में भी इसी साल मार्च में लोबिन हेंब्रम अनशन पर बैठे थे.


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