खाकपति से करोड़पति मामले में नया मोड़, झारखंड राज्य लेखा लिपिक संघ ने महालेखाकार को सौंपा ज्ञापन


दुमका (DUMKA) : दुमका के ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल में एक करोड़ 42 लाख रुपए के सरकारी राशि के गबन की प्राथमिकी आठ अक्टूबर को नगर थाना में दर्ज कराई गई. इस मामले में हमने अब तक आपको बताया कि कैसे एक अनजान शख्स रातों-रात खाकपति से करोड़पति हो गया, लेकिन उसके पूर्व हमने यह भी बताया कि सरकारी व्यवस्था में कहां कमी है जिसका फायदा गबन करने वालो को मिला. खबर चलने के बाद पूरी व्यवस्था में हड़कंप मच गया है.
झारखंड राज्य लेखा लिपिक संघ ने सौंपा ज्ञापन
झारखंड राज्य लेखा लिपिक संघ ने महालेखाकार, वित्त विभाग तथा सूचना और प्रौद्योगिकी विभाग को ऑनलाइन पेमेंट की व्यवस्था में सुधार के लिए कई बिंदुओं पर ध्यान आकृष्ट कराते हुए एक ज्ञापन सौंपा है. ज्ञापन की प्रति द न्यूज़ पोस्ट के पास भी उपलब्ध है और उसमें जो सबसे महत्वपूर्ण बिंदु बताया गया है कि वित्त विभाग झारखंड द्वारा लागू डीडीओ लेवल बिल सिस्टम में बिल क्लर्क एंड से विपत्र तैयार करने के बाद डीडीओ लॉग इन से विपत्र को ऑनलाइन कोषागार प्रेषित करने की व्यवस्था है. डीडीओ स्तर से विपत्र को ऑनलाइन कोषागार प्रेषित करने के उपरांत तथाकथित रूप से बिल से संबंधित किसी भी प्रकार के डाटा को चेंज नहीं किया जा सकता है. इस आशय का मैसेज भी इस स्क्रीन पर प्रदर्शित होता है. इसका सीधा अर्थ है कि डीडीओ स्तर से विपत्र को ऑनलाइन कोषागार प्रेषित करने के उपरांत बिल से संबंधित कोई भी डाटा डीडीओ द्वारा भी चेंज नहीं होना चाहिए. जब तक कि विपत्र को कोषागार द्वारा ऑनलाइन डीडीओ लेवल में वापस नहीं किया जाए. ज्ञापन में लिखा हुआ है कि वास्तव में यह सुरक्षा कवच काम नहीं कर रहा है.
सॉफ्टवेयर में हुई बड़ी चूक
डीडीओ लॉग इन से विपत्र को ऑनलाइन कोषागार प्रेषित करने के बाद भी उस विपत्र से संबंधित विषय वस्तु में परिवर्तन हो जा रहा है. यदि ऐसा नहीं होता तो शायद ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल दुमका द्वारा विपत्र को ऑनलाइन कोषागार प्रेषित करने के बाद जिस किसी ने अकाउंट नंबर और आईएफएससी कोड को चेंज किया, उसको सिस्टम ही ऐसा करने से रोक देता या उसका इंपैक्ट कोषागार को प्रेषित उस विपत्र में नहीं पड़ता और इतना बड़ा अपराध या सरकारी राशि का गलत हस्तांतरण सफल नहीं हो पाता. भुगतान के संबंध में इसे डीडीओ लेवल सॉफ्टवेयर की एक बड़ी चूक कहा जा सकता है. इसी तरह आठ बिंदुओं पर समीक्षा के उपरांत सुधार का अनुरोध झारखंड राज्य लेखा लिपिक संघ द्वारा किया गया है.
कंप्यूटर ऑपरेटर को भेजा जा चुका है जेल
हम आपको बताते चलें कि दुमका के रामगढ़ प्रखंड में एबीसी कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा पुल का निर्माण कार्य किया जा रहा है और निर्माण कार्य के बदले 28 अक्टूबर को विशेष प्रमंडल द्वारा एक करोड़ 42 लाख रुपया का चेक और हार्ड कॉपी कोषागार भेजा गया लेकिन उसके बाद डीडीओ लॉगइन से गबन करने वालों ने खाता संख्या को बदल दिया जिसके कारण यह राशि एबीसी कंस्ट्रक्शन के एसबीआई खाता में ना जाकर हरियाणा हिसार की एक कंपनी जी के इंटरप्राइजेज के केनरा बैंक के शाखा में चली गई और रातों-रात जी के इंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर राजेश कुमार सिंह खाकपति से करोड़पति हो गए. राजेश कुमार ने उस राशि को कई खातों में ट्रांसफर भी कर दिया. फिलहाल पुलिस पूरे मामले की अनुसंधान कर रही है और अब तक इस मामले में विशेष प्रमंडल के वरीय लेखा लिपिक और कंप्यूटर ऑपरेटर को जेल भेजा जा चुका है.
रिपोर्ट: पंचम झा, दुमका
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