रघुवर दास को  राज्य सभा भेजने की तैयारी, अगला विस चुनाव बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में लड़ने की बन रही है रणनीति

    रघुवर दास को  राज्य सभा भेजने की तैयारी,  अगला विस चुनाव बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में लड़ने की बन रही है रणनीति

    जमशेदपुर (JAMSHEDPUR) - पिछला विधानसभा चुनाव 2019में सरयू राय से हारने के बाद से ही पूर्व सीएम रघुवर दास के सितारे गर्दिश में चल रहे हैं. हारने के बाद भी पार्टी ने तब उन्हें राज्य सभा भेजने की कोशिश की लेकिन सरयू राय और आजसू का समर्थन न मिलने से झारखंड भाजपा के अध्यक्ष दीपक प्रकाश को राज्य सभा भेज दिया गया. तब सरयू राय ने दीपक प्रकाश का चुनाव में साथ दिया.
    पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अब एक बार फिर पार्टी रघुवर दास को राज्य सभा भेजने की तैयारी में हैं. भाजपा के अपने 26विधायक के अलावे निर्दलीय और आजसू का साथ मिल जाए तो ये राह आसान भी हो जाएगी. दरअसल,  मुख्तार अब्बास नकवी और महेश पोद्दार की सीट खाली हो रही है, दोनों 2016में झारखंड से राज्य सभा सांसद चुने गए थे. इस बार नकवी के झारखंड की बजाए यूपी से लड़ने के आसार हैं. ऐसे में पार्टी रघुवर दास को केंद्र की राजनीति में भेजकर एक तीर से कई निशाने साधना चाहती है. पिछले दिनों झारखंड प्रदेश संगठन प्रभारी नागेन्द्र ने राज्य का दौरा किया था जिसमें पार्टी में अंतर्कलह और गुटबाज़ी दृष्टिगोचर हुई थी. रघुवर गुट, मुंडा गुट और अब मरांडी/दीपक प्रकाश गुट में बंटी पार्टी के हालात दुरूस्त करने और कार्यकर्ताओं को एकजुट कर कलह शांत करने के लिए पार्टी बड़े कदम उठानेवाली है. कोई खुलकर तो नहीं बोल रहा मगर ये तय माना जा रहा है कि 2024का चुनाव पार्टी बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में लड़ना चाह रही है. पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा को पहले ही केन्द्रीय मंत्री बनाकर राज्य की राजनीति से दूर किया गया है और अब रघुवर दास को राज्य सभा सांसद बनाकर कलह/गुटबाज़ी समाप्त कर बाबूलाल मरांडी को मौका देने की तैयारी चल रही है.

     2019के चुनाव में भाजपा का कोल्हान से सूपड़ा साफ हो गया था और संगठन महामंत्री के कोल्हान के दौरे से ये साफ हुआ कि कलह शांत करने की कोशिश न हुई तो अगले चुनाव में खामियाजा भुगतना पड़ सकता है.
    बता दें कि रघुवर दास 1995 से जमशेदपुर पूर्वी सीट से विधायक चुने जाते रहे हैं. इसी सीट ने उन्हें विधायक, मंत्री, उपमुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री तक बनाया, लेकिन पिछले विधानसभा चुनाल 2019में वे सीएम रहते हुए सरयू राय से चुनाव हार गए और record टूट गया. इतना ही नहीं पूरे कोल्हान से पार्टी को हार मिली जिसके लिए दबी जुबान से उनको जिम्मेवार ठहराया गया. चुनाव के ऐन पहले सरयू राय का टिकट काटने में जोर लगाने का खामियाजा भुगतना पड़ा जब सरयू राय ने भाजपा छोड़कर अपनी सीट जमशेदपुर पश्चिम की बजाए जमशेदपुर पूर्वी से लड़कर रघुवर दास को हराकर इतिहास रच दिया.


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