नहाय खाय के साथ शुरू हुआ लोक आस्था का महापर्व छठ

    नहाय खाय के साथ शुरू हुआ लोक आस्था का महापर्व छठ

    गुमला (GUMLA) में लोक आस्था का महापर्व पूरी हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है. इस पर्व को लेकर पूरा माहौल भक्तिमय हो गया है. चार दिनों तक चलने वाले छठ महापर्व की शुरुआत नहाय खाय के साथ हो रही है. इसको लेकर सुबह से ही महिलाएं पूरी शुद्धता के साथ घरों में कद्दू भात बनाने में लग गयी हैं. बता दें कि कद्दू भात प्रसाद के रूप में ही बनता और ग्रहण किया जाता है. इसको बनाने से पहले सभी व्रती महिलाएं स्नान कर गंगाजल से अपने को शुद्ध कर कद्दू भात बनाती हैं.

    महाप्रसाद के रुप में कद्दू भात

    छठ करने वाली महिलाओं की माने तो कद्दू काफी सुपाच्य होता है. इस कारण से लम्बे समय से इसका उपयोग इस महापर्व में होता आया है. यह महाप्रसाद के रूप में बनाया जाता है. इसे पहले छठ व्रती धारण करते हैं. उसके बाद इसे अपने सगे सम्बधियों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है. वहीं इस प्रसाद को पाने के लिए लोगों मे काफी उत्साह और आस्था रहती है.

    शुद्धता का महत्व

    छठ की पहली पूजा के रूप में बनाये जाने वाले कद्दू भात को पूरी शुद्धता के साथ बनाया जाया है. सबसे पहले कद्दू और चावल को अच्छी तरह धोया जाता है. तब जाकर महाप्रसाद बनाने के लिए उसे उपयोग में लाया जाता है. कद्दू-भात बनाने के बाद सबसे पहले उसकी पूजा होती है. जिसके बाद प्रसाद को छठ व्रती ग्रहण करते हैं. उसके बाद परिवार के अन्य लोग कद्दू भात को महाप्रसाद के रूप ग्रहन करते हैं. वहीं ऐसी मान्यता है कि इस प्रसाद को खाने से शारीरिक विकार समाप्त हो जाते हैं.

    रिपोर्ट : सुशील कुमार सिंह, गुमला


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