दुमका(DUMKA) - आम लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन पर होती है, लेकिन उपराजधानी दुमका में शासन और प्रशासन लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं दिख रही है. दरअसल अपराध पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से 3 वर्ष पहले दुमका के विभिन्न चौक चौराहे पर कुल 28 सीसीटीवी कैमरा लगाए गए थे. जिसके मदद से पुलिस लगातार कंट्रोल रूम से पूरे शहर पर पैनी नजर बनाए रखती थी. लेकिन रख रखाव के अभाव में शहर में प्रशासनिक स्तर पर लगे तमाम सीसीटीवी खराब हो गए. आज अपराधी खुले आम दिन दहाड़े घटना को अंजाम देकर फरार हो जा रहा है. ऐसे में पुलिस के लिए अनुसंधान एक चुनौती बन गयी है. अपराधियों को भी पता है कि प्रशासन की तीसरी आंखें खराब है. इस मामले पर पूछे जाने पर एसपी अम्बर लकड़ा ने कहा कि नए सिरे से शहर में सीसीटीवी लगाने के लिए प्रपोजल बनाकर मुख्यालय भेजा गया है.
सीसीटीवी के नाम पर राजनीति
सीसीटीवी कैमरा खराब होने को लेकर हाल के दिनों में राजनीति भी खूब हो रही है. दरअसल 3 वर्ष पूर्व शहर में जो 28 सीसीटीवी कैमरा लगा था वह तत्कालीन विधायक सह मंत्री लुईस मरांडी के विधायक मद से लगा था. आज जब भी शहर में कोई बड़ी बारदात होती है, तो खराब पड़े सीसीटीवी के बहाने भाजपा नेता सरकार पर जमकर निशाना साधते नजर आते है. हाल के दिनों में दुमका में अपराध का ग्राफ बढ़ा है. इसको लेकर पूर्व मंत्री लुईस मरांडी ने कहा कि मौजूदा प्रशासन आम लोगों के प्रति संवेदनहीन साबित हुई है. अभी भी समय हैं और अगर समय रहते प्रशासन CCTV लगवाए तो जिला में लगातार होने वाली आपराधिक घटनाओं को रूकने का काम कर सकती हैं.
रिपोर्ट : पंचम झा, दुमका


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