इस दिवाली कोलनगरी पधारी लक्ष्मी....!

    इस दिवाली कोलनगरी पधारी लक्ष्मी....!

    धनबाद (DHANBAD)- आप के घर में आपकी लक्ष्मी के रूप में बेटियां आई है,तिलक चंदन लगाकर, आरती उतारिये -उनका स्वागत कीजिये. आज इसी सोच को चरितार्थ करते हुए धनबाद के शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल(पूर्व का पीएमसीएच) में 35 नवजात बेटियों को लक्ष्मी स्वरूपा मानकर उनकी आरती उतारी गई. उनको तिलक लगाया गया. उनके परिजनों को उपहार भेंट किए गए और लोगों को संदेश दिया गया कि कन्याओं की भ्रूण हत्या बंद करें, नहीं तो समाज को भारी विषमता झेलनी पड़ेगी. लिंगानुपात और घटा तो सबके लिए मुश्किल हो जाएगा. दिवाली के पूर्व ऐसा कार्यक्रम कर मेडिकल अस्पताल के गायनो प्रमुख डॉ प्रतिभा सिन्हा ने समाज को एक उपयोगी संदेश देने का काम किया है.


    बेटियों के जन्म लेने पर बंद करे ताने  देना

    साथ ही उन अभिभावकों के लिए भी यह संदेश है, जो बेटी पैदा होने पर तरह-तरह के ताने देते है. डॉ सिन्हा ने कहा कि जिस घर में नारी की पूजा होती है वहां देवता वास करते हैं. तभी तो दुर्गापूजा में शक्ति स्वरूपा देवी की पूजा करने के बाद कन्या भोजन कराया जाता है. इसके पीछे भी यही उद्देश्य है कि घर-बाहर, देश-विदेश, गांव-ज्वार सब जगह बेटियों का आदर हो,उन्हें सम्मान मिले और उनके धरती पर आने की परिवार वाले तो खुशी मनाएं ही,  समाज के लोग भी खुशियां बाटे. इससे बेटियों के प्रति लोगों के नजरिए में फर्क आएगा और समाज का बहुत भला होगा.  

    पिछले एक सप्ताह में अस्पताल में जन्मी 35 नवजात बेटियों के अभिभावक भी हुए सम्मानित

    आज 35 नवजात  बेटियों की पूजा एवं आरती के पीछे का उन्होंने जो संदेश बताया- वह यह था कि जिस तरह नवरात्रा में हम शक्ति की पूजा के क्रम में कन्याओं की पूजा करते हैं. उसी प्रकार दीपावली में हम इन्हें लक्ष्मी स्वरूपा मानकर इनका पूजा -अर्चन किए है. इस कार्यक्रम में समाजसेवी अंकित राजगढ़िया और रोटी-कपडा बैंक का महत्वपूर्ण योगदान रहा. रोटी-कपडा बैंक के लोगों ने बच्चियों के अभिभावकों को उपहार दिया.


    घर घर से रोटी इकट्ठा करने वाला बैंक

    धनबाद के रोटी बैंक एक ऐसा स्वयंसेवी संस्था है, जो घर- घर से रोटी इकट्ठा कर उन लोगों तक पहुंचाता है, जो भूखे- प्यासे सोने को मजबूर होते हैं ,संस्था के कार्यकर्ता सभी घरों में जाते हैं और कहते हैं कि आपके भोजन से अधिक,जो रोटियां हो जाती हैं ,वह हमें दे दे, इससे बहुत सारे भूखे लोगों का पेट भर जाएगा और वैसा वह करते भी है. इसके अलावा घर-घर से पुराने कपड़े इकट्ठा करते है. रोटी- कपड़ा बैंक पहले हीरापुर के दो तीन लड़कों ने शुरू किया था लेकिन धीरे-धीरे सदस्यों की संख्या बढ़ती गई और अब यह स्वयंसेवी संस्था बड़ा आकार ले लिया है और धनबाद की दानवीर धरती से इन्हें पूरा सहयोग भी मिल रहा है.

    रिपोर्ट : अभिषेक कुमार सिंह, ब्यूरो चीफ, धनबाद

     

     


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