टीएनपी डेस्क (TNP DESK): हमारे समाज में महिलाएं घर संभालने से लेकर देश संभालने तक की हिम्मत रखती है, लेकिन इन्हीं महिलाओं को तरह-तरह की बातें सुनने को मिलती है, कि महिला डरपोक होती है, कमजोर होती है,लेकिन समय आने पर हर महिलाओं ने यह सबित करके दिखाया है कि महिला कभी भी डरपोक और कमजोर नहीं होती है. अगर एक महिला ठान लें तो वह किसी का भी तख्ता पलट कर सकती है.एक ऐसी ही प्रेरणादायक महिला की के बारे हम आज बात करने वाले है जिसने यह सबित कर दिया है कि महिलाएं जब चाह ले तो कुछ भी कर सकती है.
पढ़े देशभर में क्यों हो रही है इस महिला की चर्चा
इन दिनों तमिलनाडु की एक महिला कॉन्स्टेबल की चर्चा पूरे देश में काफी जोरों पर है. दरअसल इस महिला कॉन्स्टेबल ने एक ऐसी बहादुरी का काम किया है जिसने 9 पुलिसकर्मियों को फांसी तक पहुंचा दिया.दरअसल साल 2020 में तमिलनाडु के थूथुकुडी जिले के साथनकुलम में घटित चर्चित कस्टोडियल डेथ मामले में बीते दिनों बड़ा फैसला आया.जिसमे कई पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा सुनाई गई.आपको बता दें कि ये पूरा मामला 2020 का जब लॉकडाउन के दौरान दुकान खोलने के आरोप में बाप बेटे को गिरफ़्तार किया गया. वहीं दोनों को रात भर लॉकअप में रखकर जमकर बेरहमी से पीटा गया.जिससे लॉकअप में ही उनकी मौत हो गई थी.अब आपको लगेगा कि इसमे महिला कांस्टेबल की कौन सी बहादुरी शामिल है तो चलिए आपको सिलसिलेवार तरीके से उसकी बहादुरों की कहानी बताते है.
9 पुलिसकर्मियों को फंदे तक पहुंचा दिया
दरअसल इस मामले में आरोपी 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा सुनाई गई लेकिन उनको फांसी की सजा सिर्फ एक महिला कांस्टेबल के बदौलत ही हो पाई.इस महिला कांस्टेबल का नाम रेवती है, उसने जो हिम्मत दिखाई उसी का परिणाम है कि आरोपियों को सजा मिल पाई आइए जानते है रेवती कौन है और वह कैसे इस मामले की मुख्य गवाह बन गई जिसकी वजह अरोपियों को सजा तक तक पहुंचाया दिया.
वो काली रात जिसे सुन दहल जायेगा दिल
आपको बताएं कि यह पूरा मामला थूथुकुडी जिले के सतनकुलम पुलिस स्टेशन का था. घटना के समय रेवती नाम की महिला कांस्टेबल इसी थाने में तैनात थी.रात के 8:00 बजे उसकी ड्यूटी लगी, जैसी ही वह ड्यूटी पर थाने पहुंची पूरे पुलिस स्टेशन की तस्वीर बदली बदली सी नजर आई.जहां लॉकअप से चिल्लाने और रोने की आवाज आ रही थी. ऐसा लग रहा था कोई रहम की भीख मांग रहा है रेवती को केवल एक ही आवाज सुनाई दे रहा था सर छोड़ दीजिए... मत मारिए.... बहुत दर्द हो रहा है..... गलती हो गई है.... दुकान अब नहीं खोलेंगे.... रेवती के कानों में ये आवाज गूंजती रही.याह आवाज उन्ही बाप बेटों की थी जिन्होन लोग लॉडाडाउन के दौरान दुकान खोलने की गलती कर दी थी लेकिन ये गलती इतनी बड़ी भी नहीं थी जिसकी सजा उन्हें दी जा रही थी.उन दोनों को इतना मारा गया कि लॉकअप में ही दोनों ने दम तोड़ दिया. यह सारी कहानी रेवती के दिमाग में एक कहानी की तरह बैठ गई. उसने उन आरोपियों को सजा दिलाने की सोची और ठान लिया की अब वह के कुछ ना कुछ तो जरूर करेगी.
बहादुरी और समझदारी को सलाम
पुलिस की पिटाई के दौरान जब दोनों बाप बेटे ने दम तोड़ दिया तो न्यायिक मजिस्ट्रेट एमएस भारतीदासन जांच के लिए सातनकुलम पुलिस स्टेशन पहुंचे तब महिला कांस्टेबल रेवती ने उनसे रात की पूरी सच्चाई उनके सामने खोल कर रख दी लेकिन ये सब बताने से पहले रेवती ने उनसे एक वादा भी लिया और कहा कि इस केस को लेकर आप जो भी जानना चाहते है मैं आपको जरूर बताऊंगी, लेकिन इससे पहले आपको एक आश्वासन देना होगा कि इस गवाही के बाद मेरे पति दोनों बेटियां और नौकरी की सुरक्षा आप करेंगे.मजिस्ट्रेट ने आश्वासन दिया कि आपके साथ कुछ भी गलत नहीं होगा. जो भी आप जानते है सब कुछ हमें बताएं.फिर क्या था रेवती ने एक-एक कर सभी नौ पुलिसकर्मियों के गुनाहों का वह सच उगल दिया जो उसके हिम्मत के बिना किसी को पता नहीं चल पाती.ये सब बताने के दौरान रेवती पूरी तरीके से निर्भीक और निडर दिखी . उसको जरा भी इस बात का डर नहीं था कि वह जिनके खिलाफ गवाही दे रही है उनके वरिष्ठ पुलिसकर्मी है.
महिला क्या कुछ नहीं कर सकती है
सारी बातों को सुनने के बाद न्याययिक मजिस्ट्रेट एमएस भारती दासन ने रेवती को सरकारी गवाह बनाया. रेवती ने कोर्ट में ये सारा कुछ बता दिया कि कैसे रात भर दोनों बाप बेटे को बेरहमी से पीटा गया. वो रहम की भीख माँगते रहे लेकिन सभी पुलिसकर्मी उनको जानवरों की तरफ पीटते रहे और और टॉर्चर करना बंद नहीं किया. यह दृश्य इतना भयावह था कि वह खुद को रोक नहीं पायी और वहां से निकल गई.रेवती ने दरिंदे पुलिसकर्मियों के बारे में यह भी बताया कि वह बीच-बीच में केवल शराब पीने के लिए रुक रहे थे और फिर से बाप बेटे को पीटना शुरू कर रहे थे.बेरहमी की हद का पता आप इस बात से लगा सकते हैंकि दोनों के हाथ पैरों को बांधा गया था तब पीटा जा रहा था और जब पानी मांग रहे थे तो उन्हें पानी भी नहीं दिया जा रहा था.
इस तरह बनी सरकारी गवाह
रेवती ने अपने इस मामले से जुड़े अनुभव को बताते हुए कहा है कि सरकारी गवाह बनने का यह फैसला उसके लिए काफी मुश्किल था लेकिन उसने सच का साथ देने का सोचा क्योंकि जो भी पुलिसकर्मी थे इनकी वजह से पुलिस स्टेशन का माहौल पूरी तरीके से भयावह था, उसे काफी ज्यादा दबाने और चुप रहने का दबाव बनाया गया लेकिन फिर भी हिचकिचाते हुए उसने आख़िरकार सारा कुछ उगल दिया.रेवती की वजह से ही उव जालिम पुलिसकर्मियों को सुली पर चढ़ाया जा सका जिन्होनें बाप बेटों के साथ ऐसी दरिंदगी की हद पार की थी जिसके बारे में लोग सोच कर भी डर जाते है.इस महिला कांस्टेबल ने वह हिम्मत दिखाई है जो शायद बड़े ताकतवर भी नहीं दिखा पाते है उसने इस केस को बड़ी मजबूती दी जिसकी वजह से दोषियों को सजा मिल पाई.
Thenewspost - Jharkhand
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