Chhath puja: छठी मईया से जुड़ी मुस्लिम महिलाओं की आस्था, 19 सालों से कर रही हैं व्रत, पढ़ें कैसे मईया ने सुनी इनकी पुकार

    Asansol, West Bengal
    Chhath puja: छठी मईया से जुड़ी मुस्लिम महिलाओं की आस्था, 19 सालों से कर रही हैं व्रत, पढ़ें कैसे मईया ने सुनी इनकी पुकार

    पश्चिम बंगाल(PASCHIM BANGAL):आस्था का महापर्व छठ पूजा सूर्य उपासना का सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है, जो सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है,  इस पर्व में भगवान सूर्य के साथ छठी माई की पूजा-उपासना विधि-विधान के साथ की जाती है, चार दिनों तक चलने वाले छठ पूजा का आज दूसरा दिन है. आज सभी छठ व्रती खरना पूजा कर प्रसाद ग्रहण करेंगी. धार्मिक मान्यता के अनुसार छठ का व्रत संतान प्राप्ति की कामना, संतान की कुशलता, सुख-समृद्धि और उसकी दीर्घायु के लिए की जाती है, शायद यही एक वजह है जिस वजह से हिंदू लोगों के साथ गैर धर्म के लोग भी छठ पर्व के साथ जुड़ रहे हैं.

    पिछले 19 सालों से बादली बीबी कर रही है छठ व्रत

    जहां पश्चिम बंगाल में अब मुस्लिम महिलाएं भी आस्था के इस पर्व को नियम धर्म से कर रही है.आसनसोल के सीतारामपुर इलाके में रह रही 37 वर्षीय एक मुस्लिम महिला बादली बीबी पिछले 19 वर्ष से छठ पर्व कर रही हैं, बादली बीबी की माने तो उनकी 57 वर्षीय मां मर्जीना शेख काफी बीमार हो गई थीं, अपनी मां को स्वस्थ करने के लिये बादली ने आसनसोल के एक से बढ़कर एक चिकित्सक को दिखाया पर उनकी मां के स्वास्थ्य ठीक होने के जगह और भी बिगड़ता चला गया, जब सारी उम्मीद टूट चूकी थी, तब किसी ने बादली को बताया कि छठ मां की पूजा करने से मां छठ ब्रतियों की मनोकामना पूर्ण करती है. इसको सुनकर बादली ने छठ पूजा करने की मनोकामना की. जिसके बाद बादली की मां ठीक हो गई.वहीं जब छठ पर्व का समय आया, तो बादली ने छठ पूजा किया

    छठी मईया ने भरी मिली बेगम की सूनी गोद

    आज 19 वर्ष हो गए हैं बादली को छठ के प्रति इतनी अटूट आस्था है कि वह आज भी पूरी निष्ठा और नियम के साथ छठ का पर्व करती है, बादली के घर से महज एक किलोमीटर की दूरी पर मिली बेगम नाम की एक 45 वर्षीय महिला है, जिसका कोई बच्चा नहीं था, महिला की माने तो दो बार उसका बच्चा उसके गर्भ मे ही ख़राब हो चुका था, जिसके बाद चिकित्सकों ने उसे यह कह दिया था कि उस महिला को कोई बच्चा नहीं होगा, महिला काफी दुखी हो गई, जिसके बाद उनके इलाके की रहने वाली तारा देवी ने विश्वास दिलाया कि वह छठ मां से अपनी सुनी गोद को भरने के लिये मन्नत मांगे, वह जरूर उसकी मन्नत पूरा करेंगी. मिली ने तारा देवी के कहने पर सुनी गोद को भरने की मन्नत मांगी. जिसके बाद छठ मईया ने मिली बेगम की मन्नत पूरी की. मिली को एक बेटी हुई, जो अब 19 वर्ष की हो चुकी है. तब से मिली छठ माता की पूजा कर रही है.


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