जिला स्तरीय मल्टी स्टेक कार्यशाला: हम सब मिलकर करें काम तो समाज को होगा बड़ा फायदा, जानिए क्या करना चाहिए


धनबाद(DHANBAD): झारखंड विधिक सेवा प्राधिकार व प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश बालकृष्ण तिवारी के निर्देश पर आयोजित सड़क दुर्घटना व एनडीपीएस एक्ट पर एक दिवसीय जिला स्तरीय मल्टी स्टेक होल्डर कंसल्स्टेशन कार्यशाला का उद्घाटन सिविल कोर्ट धनबाद में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश बालकृष्ण तिवारी, जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनीष रंजन, जिला एवं सत्र न्यायाधीश के .के शुक्ला ,बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राधेश्याम गोस्वामी ने दीप प्रज्वलित कर किया. इस मौके पर न्यायाधीश बालकृष्ण तिवारी ने कहा कि समाज के प्रति हम सब की जिम्मेवारी है. जिसे समय पर पूरा करना हमारा कर्तव्य है. सड़क दुर्घटना में समय पर कागजात कोर्ट में जमा नहीं किए जाने के कारण मृतकों के परिजनों को मुआवजा नहीं मिल पाता है.
इस विषय पर पुलिस पदाधिकारियों को संदेश देते हुए न्यायाधीश ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश मे स्पष्ट कहा है कि सड़क दुर्घटना के मामले में किसी भी हालत में 30 दिन के अंदर दुर्घटना सूचना रिपोर्ट कोर्ट को भेज देनी है , अन्यथा थाने के भार साधक अधिकारी पर कार्रवाई हो सकती है. उन्होंने कहा कि यदि समय पर पुलिस ऐसा कर दें तो मृतक के परिजनों को तमाम मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ेगा , यह समाज के प्रति हमारा कर्तव्य है । न्ययाधिश मनीष रंजन ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि दुर्घटना दावा से संबंधित आवेदन घटना के छह माह के अंदर ट्रिब्यूनल में दायर कर देना चाहिए अन्यथा पीड़ित पक्ष को कानूनी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. जिला एवं सत्र न्यायाधीश के.के शुक्ला ने अपने संबोधन में कहा कि एनडीपीएस एक्ट में सजा जितनी सख्त है, वैसे ही एक्ट के प्रावधानों के अनुपालन की शर्तें भी कठोर हैं . जिसका पालन नहीं करने पर आरोपियों को लाभ मिल जाता है.
न्यायाधीश मयंक तुषार टोपनों ने कहा कि सड़क दुर्घटना में घायल अथवा मृत हुए लोगों के लिए केंद्र सरकार द्वारा राहवीर योजना की शुरुआत की गई है, जिसके तहत घायलों को को तुरंत अस्पताल पहुंचाने वाले लोगों के लिए पारितोषिक रखा गया है. कोई भी अस्पताल अथवा पुलिस अधिकारी घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले से पूछताछ नहीं करेगी. लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के डिप्टी चीफ अजय कुमार भट्ट ने एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कई बार ठोस मामला सिर्फ इसलिए अदालत में गिर जाता है, क्योंकि जांच अधिकारी ने कानून के स्पिरिट को तो समझा, लेकिन उसकी प्रक्रिया पालन मे चूक कर दी . अपर लोक अभियोजक अवधेश कुमार ने एनडीपीएस एक्ट के तहत सर्च एवं जब्ती की प्रक्रिया को बताया ट्रैफिक डीएसपी अरविंद कुमार सिंह ने लोगों को सावधानीपूर्वक सड़क पर गाड़ी चलाने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि वर्ष 25 मे 17 लाख लोग भारत में सड़क दुर्घटना के कारण मौत के मुंह में जा चुके हैं . अधिवक्ता बिप्लव दास ने मोटर यान दुर्घटना दावा अधिनियम के प्रावधानों के विस्तृत जानकारी दी .
रोड सेफ्टी मैनेजर सुुनील कुमार ने कहा कि असावधानी के कारण ही आए दिन दुर्घटना हो जाया कर रही है. उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटना के चार प्रमुख कारण होते हैं. बिना हेलमेट पहने गाड़ी चलाना , नशे में गाड़ी चलाना, तेजी व लापरवाही से गाड़ी चलाना,समय पर इलाज नहीं हो पाना .डॉक्टर राजीव सिंह ने कहा कि दुर्घटना में घायल व्यक्ति को तुरंत लेटा देना चाहिए, कभी भी नहीं बैठाना चाहिए , डॉक्टर रेखा कुमारी ने कहा कि दुर्घटना के एक घंटे के अंदर यदि संबंधित व्यक्ति को इलाज मुहैया करा दिया जाए तो उसकी जान बच सकती है. एलएडीसियस चीफ कुमार विमलेंदु व अपर लोक अभियोजक सतेंद्र कुमार राय ने मोटर यान दुर्घटना अधिनियम, व नये आपराधिक कानून से संबंधित विभिन्न प्रावधानों की जानकारी दी .
कार्यशाला मे जिला एवं सत्र न्यायाधीश , पारस कुमार सिन्हा, मनीष , विजय कुमार श्रीवास्तव, राकेश कुमार ,साकेत कुमार, प्रफुल्ल कुमार, मनीष, मधुरेश कुमार वर्मा, श्री बिकेश मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी आरती माला ,अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी पार्थ सारथी घोष, अवर न्यायाधीश शमा रोशनी कुल्लू , निर्मला बारला, मनीष मिश्रा ,अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी अभिजीत पाण्डे, अपर एवं सहायक लोक अभियोजक, एलएडीसीएस के सहायक कन्हैयालाल ठाकुर, नीरज गोयल, सुमन पाठक, स्वातिकुमारी, मुस्कान चोपड़ा विभिन्न थानों के थाना पदाधिकारी, डालसा, सहायक सौरभ सरकार, अरुण कुमार, राजेश सिंह पारा लीगल वालंटियर, मेडिएटर, डालसा के पैनल अधिवक्ता, शामिल थे.
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