टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : आज कल के मॉडर्न जमाने में जिस तरह लोग स्मार्ट फोन को अपने जीवन में प्राथमिकता दे रहे है, उसकी कल्पना करना मुश्किल है. एक छोटे से साइज़ का स्मार्ट फोन आज लोगों के ज़िंदगी में बड़ा हिस्सा बन चुका है. जिस तरह एक आम आदमी का सांस लेना जितना जरूरी है उतना जरूरी उनके लिए स्मार्ट फोन का इस्तेमाल करना है. आज के युग में अधिकतर लोगों का काम स्मार्ट फोन से होता है. एक आम आदमी सुबह सबसे पहले उठाकर अपने फोन को चेक करता है, अपने साथ बाथरूम ले जाता है, खाना देख कर खाता है या कई बार तो ड्राइव करते वक्त भी स्मार्ट फोन का इस्तेमाल करता है. लेकिन इन सब के बीच भले स्मार्ट फोन के आ जाने से ज़िंदगी आसान हो गई है लेकिन इसका खामियाज़ा भी भुगतना पड़ रहा है. एक शोध में पाया गया की अत्यधिक फोन इस्तेमाल करने से स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है. आज एक इंसान स्मार्ट फोन पर इतना निर्भर हो गया है की उसे स्वास्थ्य संबंधित बीमारियों के लिए भी स्मार्ट फोन का सहारा लेना पड़ता है। यही कारण है की इन सब के पीछे इंसान अपनी सेहत का ध्यान नहीं दे पाता.
एक अध्ययन में पाया गया की स्मार्टफोन का अत्यधिक इस्तेमाल करने से दिमाग पर काफी जोर पड़ता है रोजमर्रा की ज़िंदगी में इसका असर देखने को मिलता है. एक आम इंसान स्मार्टफोन का अत्यधिक इस्तेमाल विशेष रूप से सोशल मीडिया पर स्क्रॉल करने, कमर्शियल साइट्स पर शॉपिंग करने और देश दुनिया में क्या चल रहा वो पढ़ने या विडिओ देखने के लिए इस्तेमाल करते है जिससे सीधा सीधा असर हमारे मानसिक स्थिति पर पड़ने लगता है.
डिजिटल डिटॉक्स कितना जरूरी
हमारे जीवन में डिजिटल डिटॉक्स की काफी जरूरत है, ये इसलिए क्योंकि अगर आप स्मार्ट फोन से दूरी बनाते है तो ये ना सिर्फ आपके स्वास्थ्य को ठीक करेगा बल्कि आपके दिनचर्या को सुधरेगा.
क्या है डिजिटल डिटॉक्स
डिजिटल डिटॉक्स एक ऐसी अवधि है जिसमें व्यक्ति स्मार्टफोन, कंप्यूटर और सोशल मीडिया जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से दूर करने में मदद करता है. साथ ही तनाव कम करने और वास्तविक दुनिया के साथ फिर से जुडने का तरीका हैं.
कैसे लाए डिजिटल डिटॉक्स को रूटीन में
डिजिटल डिटॉक्स को अपने जीवन में लाने के कई सारे तरीके है जैसे –
फोन इस्तेमाल का समय चुने
स्मार्टफोन इस्तेमाल करना आप एकदम से तुरंत बंद नहीं कर सकते इसलिए आप एक समय सीमा निर्धारित कर दें की कब आपको स्मार्टफोन या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल करना है.
नो फोन पॉलिसी
यह पॉलिसी इस्तेमाल करके आप ये निर्धारित कर सकते है की कहां पर आपको फोन की एकदम जरूरत नहीं है. जैसे आप यह सुनिश्चित करे की आपको सुबह उठकर स्मार्टफोन ना देखकर कोई अन्य काम करें,या फिर खाते समय फोन पर नहीं अपने परिवार के साथ समय व्यतीत करे. सोते समय सोशल मीडिया सकरोलिंग से बचे, रात में फोन का नोटिफिकेशन ऑफ करे या ‘DO NOT DISTURB’ का ऑप्शन भी सेट करके रख सकते है ताकि आपको अनचाहा मेसेजेस ना आए.
डिजिटल डिटॉक्स के फायदे
मानसिक शांति
अक्सर ऐसा देखा जाता है की कई लोग फालतू की सूचनाओं का जल्दी ही शिकार हो जाते है। जिससे उनके दिमाग में काफी असर पड़ता है, लेकिन अगर आप डिजिटल डिटॉक्स करते है तो आपको इससे छुटकारा मिल सकता है.
अच्छी और बेहतर नींद
अगर आप फोन सेटिंग में स्क्रीन की ‘ब्लू लाइट’ बंद कर देंगे तो इससे आपकी नींद की क्वालिटी सुधरती है.
रिश्तों में सुधार
अक्सर माता पिता की शिकायत रहती है की उनके बच्चे फोन में इतना घुस जाते है की बच्चे अपने परिवार को समय नहीं दे पाते. इसलिए अगर आप फोन इस्तेमाल का समय निर्धारित करते है तो आप अपने परिवार के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिता पाएंगे.
एकाग्रता में बढ़त
अगर आपको भी फोन बार बार चेक करने की आदत है तो सतर्क हो जाईए क्योंकि यह आदत आपको भारी पड़ सकती है. अगर आप बार-बार नोटिफिकेशन चेक न करे तो आपकी काम की प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी, साथ ही वास्तविक जीवन में मौजूद रह पाएंगे.

