पुल का इंतजार, नक्सल का डर, विकास से कोसो दूर है चाईबासा का "टोपाबेड़ा” गाँव

    पुल का इंतजार, नक्सल का डर, विकास से कोसो दूर है चाईबासा का "टोपाबेड़ा” गाँव

    चाईबासा (CHAIBASA): चाईबासा जिला मुख्यालय चाईबासा से लगभग 50 किलोमीटर दूर टोंटो प्रखंड के घने जंगलों में स्थित टोपाबेड़ा गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है.यह गांव पूरी तरह नक्सल प्रभावित क्षेत्र में आता है, जहां बरसात के मौसम में ग्रामीणों का जीवन पूरी तरह ठहर सा जाता है.गांव की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां के लोग जब भी बाहर निकलना चाहते है, तो उन्हें पास बहने वाली बिना पुल वाली देवनदी पार करनी पड़ती है.

    बरसात के दिन में टापू में तबदील हो जाता है गांव

    बारिश के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने से यह रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है, जिससे ग्रामीण कई-कई सप्ताह तक गांव में ही फंसे रहते है.ग्रामीणों के पास केवल एक ही छोटा रास्ता है, जबकि दूसरा रास्ता 15 से 20 किलोमीटर लंबा है, जो समय और पैसे दोनों की भारी बर्बादी करता है.इसी वजह से लोग जोखिम उठाकर शॉर्टकट रास्ता ही अपनाते है.

    देवनदी पर पुल बनना बेहद जरूरी

    बरसात में स्थिति और गंभीर हो जाती है, जब लोग पहले से ही खाद्य सामग्री जमा कर लेते है.ग्रामीणों का कहना है कि देवनदी पर पुल बनना बेहद जरूरी है, जिससे उनकी परेशानी काफी हद तक कम हो सकती है। हालांकि, ग्रामीणों के अनुसार पुल का निर्माण कार्य शुरू तो हुआ है, लेकिन इसके पूरा होने की कोई निश्चित जानकारी नहीं है.

    रिपोर्ट-संतोष वर्मा



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