रांची(RANCHI): झारखंड में नक्सलियों के खिलाफ एक तरफ सुरक्षा बल के जवानों की कार्रवाई जारी है तो दूसरी तरफ अभी भी उनके वार्ता का रास्ता पुलिस मुख्यालय ने खुला रखा है. जिसमें सरकार की आत्म समर्पण और पूर्णवास नीती का फायदा नक्सलियों को मिल सके. इसी कड़ी में पुलिस मुख्यालय में पुलिस महानिदेशक ने एक समीक्षा बैठक की. जिसमें अब तक आत्म समर्पण करने वाले नक्सलियों को मिले लाभ पर चर्चा की गई. साथ ही अभी भी राह से भटके नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने की रणनीति पर जोर दिया गया. बैठक में DGP के साथ सभी प्रक्षेत्र आईजी,डीआईजी और जिले के पुलिस अधीक्षक शामिल हुए.
बैठक पुलिस मुख्यालय स्थित सभागार में आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता DGP तदाशा मिश्र ने की. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के सभी जिलों के वरीय पुलिस अधीक्षक और पुलिस अधीक्षक इस बैठक से जुड़े. बैठक में पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार की ओर से दी जाने वाली सुविधाओं और लाभों की समीक्षा की गई. समीक्षा के बाद DGP ने निर्देश दिया कि सभी जिलों में इन नक्सलियों को तय प्रावधानों के अनुसार पूरी सहायता सुनिश्चित की जाए.
इसके साथ ही, नक्सलियों के खिलाफ न्यायालयों में लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए स्पीडी ट्रायल को भी प्राथमिकता देने को कहा गया. हर जिले में पुलिस अवर निरीक्षक या उससे ऊपर के अधिकारी को नोडल पदाधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए गए, जो आत्मसमर्पित नक्सलियों की समस्याओं के समाधान और पुनर्वास योजनाओं की निगरानी करेंगे.
बैठक में यह भी जोर दिया गया कि पुनर्वास योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि अभी भी सक्रिय नक्सलियों को आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया जा सके. इस दौरान पुलिस उप महानिरीक्षक संजीव कुमार, पुलिस अधीक्षक नाथु सिंह मीणा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे, जबकि राज्यभर के पुलिस अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में शामिल हुए.


