धनबाद के गांव में सामाजिक बहिष्कार से सूखा नल-जल, बूंद-बूंद को तरसा लाहबेड़ा गांव

    धनबाद के गांव में सामाजिक बहिष्कार से सूखा नल-जल, बूंद-बूंद को तरसा लाहबेड़ा गांव

    धनबाद (DHANBAD): एक तरफ सरकार 'हर घर नल का जल' पहुँचाने के दावे कर रही है तो दूसरी तरफ आज भी समाज में व्याप्त कुरीतियां विकास पर भारी पड़ रही हैं. मामला धनबाद जिले के पूर्वी टुंडी से है जहाँ प्यास पर भी 'पाबंदी' लगा दी गई है. आपसी विवाद और सामाजिक बहिष्कार के चलते एक पूरे टोले का पानी बंद कर दिया गया है. दर्जनों ग्रामीण अब इंसाफ की गुहार लेकर थाने की चौखट पर खड़े हैं.

    हुक्का पानी बंद, नल-जल योजना विफल 

    धनबाद जिले के पूर्वी टुंडी प्रखंड अंतर्गत रूपन पंचायत का लाहबेड़ा गांव आज सुर्खियों में है लेकिन वजह विकास नहीं बल्कि एक सामाजिक विवाद है. गांव के 'नीचे टोला' में रहने वाले दर्जनों परिवार आज बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं आरोप है कि 'ऊपर टोला' के ग्रामीणों ने विवाद के बाद नीचे टोला के लोगों का सरकारी चापाकल, कुआं और तालाब का इस्तेमाल बंद कर दिया है.

    सामाजिक कुरीति की भेंट चढ़ा भाईचारा

    ग्रामीणों का कहना है कि सामाजिक कुरीति के तहत उनका 'हुक्का-पानी' बंद किया गया है और उनके साथ मारपीट भी की गई है. जल ही जीवन है लेकिन सरकारी नल-जल योजना यहाँ धरातल पर नाकाम साबित हो रही है. ग्रामीण प्यास बुझाने के लिए न्याय की गुहार लगा रहे हैं. वही थाना प्रभारी नीतीश कुमार ने सामाजिक कुरीति या भेदभाव फैलाने वालों पर सख्ती बरतने की बात कही गई है.

    सवाल यह उठता है कि डिजिटल इंडिया के दौर में क्या आज भी हमारी प्यास सामाजिक कुरीतियों से तय होगी क्या प्रशासन इस मामले में कोई स्थाई समाधान निकाल पाएगा ताकि फिर कभी किसी को पानी के लिए थाने न जाना पड़े.

    रिपोर्ट – नीरज कुमार



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