भाड़े की बाइक बनी मर्डर का हथियार , जमशेदपुर का गैंगस्टर कैसे बना लिया था उत्तराखंड को "सेफ सेल्टर"! 

    Rented bike became the weapon of murder, how did the gangster of Jamshedpur make Uttarakhand a safe shelter। भाड़े की बाइक बनी मर्डर का हथियार , जमशेदपुर का गैंगस्टर कैसे बना लिया था उत्तराखंड को सेफ सेल्टर

    धनबाद(DHANBAD):  जमशेदपुर के "हिस्ट्रीशीटर"  विक्रम शर्मा को 2017 में देहरादून से गिरफ्तार किया गया था.  गिरफ्तारी के बाद ट्रांजिट रिमांड पर जमशेदपुर लाया गया था.  2017  से लेकर 2021 तक वह जेल में था.  अब सवाल उठ रहा है कि झारखंड का कुख्यात  विक्रम शर्मा देहरादून  इलाकों में बरसों से रह रहा था.  देहरादून पुलिस और उसकी लोकल इंटेलीजेंस यूनिट को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी थी.  शुक्रवार को हुई हत्या के बाद खुफिया तंत्र की पोल पूरी तरह से खुल गई है.  

    सवाल -आखिर कैसे सुरक्षित ठिकाना बना लिया था देहरादून को 

    सवाल उठाए जा रहे हैं कि इतना बड़ा अपराधी स्टोन क्रशर  और प्रॉपर्टी कारोबार  कैसे बढ़ा लिया था? बताया यह भी  जा रहा है कि आईजी ने जिला पुलिस से इस संबंध में तत्काल रिपोर्ट मांगी है.  विक्रम शर्मा हत्याकांड के बाद देहरादून की पुलिस भी चौंकनी हो गई है.  कंस्ट्रक्शन और प्रॉपर्टी डीलिंग के धंधे में लगे लोगों की  जांच की तैयारी है.  पुलिस ऐसे सभी लोगों का डेटाबेस तैयार  करेगी. अगर कोई अपराधी इस धंधे की आड़ में छिपा मिला तो कार्रवाई होगी।  सूचना के मुताबिक देहरादून पुलिस झारखंड भी पहुंची है और जांच पड़ताल कर रही है. 

    सत्ता के गलियारे में भी इस तरह बना ली थी पैठ 
     
    सूत्र दावा कर रहे हैं कि गैंगस्टर विक्रम शर्मा उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की  सत्ता के गलियारों में भी अपनी पैठ  बना ली थी.  लम्बे समय  तक वह उत्तराखंड में पहचान छिपाकर  रह रहा था.  इस दौरान वह जनप्रतिनिधियों के साथ अच्छी दोस्ती गांठ ली थी. कुछ नौकरशाहों के साथ भी उसका उठना -बैठना था.  इस वजह से उसे यहां "सेफ सेल्टर " मिल गया था और स्टोन क्रेशर के कारोबार में एंट्री ले लिया था.  सूचना के मुताबिक 2015 से पहले ही उसने उत्तराखंड में अपना पैर  जमा लिया था.  विक्रम शर्मा की हकीकत पहली बार तब लोगों के सामने आई , जब 2017 में झारखंड पुलिस ने देहरादून से  उसे गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई थी.  

    शर्मा बंधुओं में किस बात को लेकर चल रहा था विवाद 
     
    इधर, यह भी  सूचना है कि विक्रम शर्मा की अपने छोटे भाई अरविंद शर्मा से मनमुटाव चल रहा था.  शर्मा बंधुओं  में विवाद की वजह बाजपुर स्थित स्टोन क्रेशर बताया जा रहा है.  यह 2014 से संचालित है.  पहले इसका संचालन छोटा भाई करता था.  जिसने इसे लीज पर दिया हुआ था.  करीब दो-तीन साल पहले आपसी बंटवारे के बाद स्टोन क्रेशर का संचालन विक्रम शर्मा कर रहा था.  विक्रम शर्मा भी इसे लीज  पर दे रखा था.  पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि शूटर जमशेदपुर से आकर उत्तराखंड में कहां ठहरे थे और फिर कहां लापता हो गए.  बताया जाता है कि शूटर विक्रम शर्मा को गोली मारने के बाद भी हड़बड़ी में  नहीं थे. मतलब शातिर थे.  जिम  से निकलकर राजापुर की तरफ पैदल ही दौड़े, करीब 200 मीटर की दूरी पर बस स्टॉप के पास उनका तीसरा साथी बाइक स्टार्ट कर खड़ा था.  दोनों शूटर बाइक पर बैठे और वहां से भाग निकले। 

    भागने के लिए बदमाशों ने मुख्य  रोड की बजाय दूसरा रास्ता चुना

    भागने के लिए बदमाशों ने मुख्य  रोड की बजाय दूसरा रास्ता चुना, सूत्र बताते हैं कि विक्रम शर्मा की हत्या की प्लानिंग ठोस और सही टाइमिंग में की गई थी.  उनके   पास विक्रम शर्मा के घर से निकलने से लेकर जिम में बिताए जाने वाले वक्त का पूरा डिटेल था.   हत्या करने के बाद भागने का रास्ता अपराधियों ने पहले ही चुन लिया था.  सूत्र तो यह भी बता रहे हैं कि शुक्रवार की सुबह विक्रम शर्मा जैसे ही घर से निकला, शूटर उनके पीछे लग गए थे. घटनास्थल से कुछ दूर जाकर अपराधी अपने अपनी बाइक फेंक दी और दूसरे दूसरे वाहन  से हरिद्वार तक पहुंचे। सीसीटीवी फुटेज से पुलिस को इसकी जानकारी मिल रही है.  यह भी बताया जा रहा है कि हमलावरों ने वारदात के लिए बाइक हरिद्वार से किराए पर लिए थे. अब पुलिस इन बातों की जाँच कर रही है. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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