भाजपा की एक तरफ बैठक उधर विधायक शशि भूषण को लेकर हो रही थी नारेबाजी, समझिए क्या है पराजय झेल रही भाजपा के लिए एक नई मुसीबत

    भाजपा की एक तरफ बैठक उधर विधायक शशि भूषण को लेकर हो रही थी नारेबाजी, समझिए क्या है पराजय झेल रही भाजपा के लिए एक नई मुसीबत

    रांची(RANCHI): झारखंड विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार पर भाजपा समीक्षा करने में जुटी है. दूसरी ओर संगठन में वर्चस्व कायम करने को लेकर दबाव की राजनीति शुरू हो गई है. एक ओर देखें तो राहुल गांधी जातिगत जनगणना आवाज उठाते है. इसके पक्षधर मानें जाते है, लेकिन भाजपा इस जातिगत जनगणना के खिलाफ दिखती है. भाजपा का मानना है कि जाति के आधार पर जनता को नहीं बांटा जा सकता है. ऐसे में अब भाजपा में जाति के आधार पर कुर्सी की डिमांड होने लगी है. देखा जाए तो यह साफ है कि भाजपा लाख जाति के खिलाफ होने का दावा करे लेकिन, जो तस्वीर भाजपा प्रदेश कार्यालय के बाहर देखी गई. जो अपने आप में बड़ा सवाल खड़ा हो रहा हैं.

    हार पर भाजपा का मंथन जारी
    दरअसल झारखंड में चुनाव के दौरान कई प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा तो कई की किस्मत खुली और दोबारा से रिपिट होकर विधानसभा पहुँच गए. इधर, जिस सीट पर उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा है उस सीट की समीक्षा जारी है, खुद केन्द्रीय महा मंत्री बीएल संतोष इस बैठक में मजूद है. इसी दौरान पांकी विधानसभा से दूसरी बार  चुनाव जीत कर भाजपा का झंडा बुलंद करने वाले कुशवाहा शशिभूषण मेहता के समर्थक प्रदेश कार्यालय तक पहुँच गए. कहने को खुद कुशवाहा समाज के अलग-अलग संगठन से होने का दावा कर रहे थे. लेकिन सभी के हाथ में तख्ती और बैनर था जिसमें साफ लिखा हुआ है कि शशिभूषण मेहता को नेता प्रतिपक्ष या प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए. जब मांग कर रहे लोगों से सवाल पूछा गया कि क्या जाति के नाम पर कुर्सी कैसे मिलेगी. इसपर सभी का साफ कहना था कि भाजपा को शुरू से वोट देते रहे है. अब समय है कि उनके जाति के लोगों को पार्टी से सम्मान मिले. 

    जाति के आधार पर कार्यकर्ता मांग रहे अपनी भागीदारी 
    इस बयान से साफ है कि एक तरह से प्रेसर बनाने की कोशिश चल रही है. हालांकि इसका कितना फायदा शशिभूषण मेहता को मिलेगा यह तो समय ही बता पाएगा. लेकिन इस मांग से यह तो साफ है कि शायद सभी राहुल गांधी के भाषण से प्रभावित हो गए और जाति के आधार पर अपनी भागीदारी मांगने पार्टी दफ्तर तक पहुँच गए. अगर देखें तो भाजपा में ऐसा पहली बार देखने को मिला है. जब किसी को संगठन या नेता प्रतिपक्ष  बनाने के लिए कोई प्रदेश कार्यालय तक पहुंच गया हो. अब इस पर संगठन का क्या रुख होता है यह आने वाला समय ही तय कर पाएगा.

    रिपोर्ट:समीर हुसैन


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