पश्चिम सिंहभूम में हाथियों का कहर: 5 की मौत से आदिवासी गांवों में दहशत, फिर भी प्रशासन बेखबर


सिंहभूम (SINGHBHUM): पश्चिम सिंहभूम अब सिर्फ मानव–वन्यजीव संघर्ष का क्षेत्र नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी उपेक्षा के कारण यह क्षेत्र खुला कत्लगाह बनता जा रहा है. 6 जनवरी की रात जेटेया थाना क्षेत्र के बाबरिया गांव में एक हिंसक हाथी ने दो परिवारों पर हमला कर पांच लोगों की जान ले ली. मृतकों में सनातन मेराल (52 वर्ष), उनकी पत्नी जोलको कुई (50 वर्ष), दो मासूम बच्चे मुगडु मेराल (5 वर्ष) और दम्यंती मेराल (8 वर्ष) तथा मोगदा लागुरी शामिल हैं. एक ही घर में माता–पिता और बच्चों की लाशें मिलने का दृश्य गांववालों के लिए किसी त्रासदी से कम नहीं था.
हाथी का आतंक बाबरिया तक सीमित नहीं रहा. बड़ा पासिया गांव में मंगल बोबंगा (22 वर्ष) और लांपाईसाई गांव में एक अन्य ग्रामीण की मौत हुई. इन घटनाओं ने साबित कर दिया है कि यह केवल एक प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक नाकामी का नतीजा है. पिछले 10 दिनों में सोयां, कुलसुता और अन्य गांवों में 20 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन वन विभाग और सरकार अब तक प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रही हैं.
कोल्हान और सारंडा के जंगल गांवों में हालात भयावह हैं. लोग खेतों में नहीं जा रहे, घरों में चैन से सो नहीं पा रहे. महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग खुले आसमान के नीचे ठंड में रात बिताने को मजबूर हैं. ग्रामीणों का कहना है कि संवेदना या मुआवजा नहीं चाहिए, उनकी एक ही मांग है, “इस खूनी हाथी को तुरंत रोका जाए”.
हाथी को बार-बार हिंसक होने दिया गया, लेकिन न कोई ट्रैकिंग हुई, न नाइट पेट्रोलिंग, न ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए कोई योजना बनाई गई. अगर अब भी प्रशासन ने कदम नहीं उठाया, तो आने वाले दिनों में सारंडा और कोल्हान के जंगल गांव खाली हो सकते हैं. पश्चिम सिंहभूम में अब हाथी से ज्यादा खतरनाक स्थिति है प्रशासन की चुप्पी और बेरुखी, जो हर दिन आदिवासी समुदाय के जीवन पर मौत का साया डाल रही है.
रिपोर्टर: संतोष वर्मा
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