Jharkhand Assembly Election: सिर्फ आजसू ही नहीं, कांग्रेस पर भी कुछ इस प्रकार दिखा जयराम महतो का खौफ!

    Jharkhand Assembly Election: सिर्फ आजसू ही नहीं, कांग्रेस पर भी कुछ इस प्रकार दिखा जयराम महतो का खौफ!

    धनबाद(DHANBAD): झारखंड के पूर्व कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्षों में अब राजेश ठाकुर का नाम भी शामिल हो गया है. साथ ही विधायक दल के नेता की कुर्सी आदिवासी नेता के हाथ कांग्रेस ने सौप दी है. जाहिर है यह सब कदम विधानसभा चुनाव को देखते हुए उठाए गए है. झारखंड बनने के बाद पहले अध्यक्ष बने थे इंद्र नाथ भगत, उसके बाद प्रदीप बालमुचू, फिर थॉमस हांसदा, उसके बाद सुशीला केरकट्टा,  फिर सुखदेव भगत, उसके बाद डॉक्टर अजय कुमार फिर डॉ रामेश्वर उरांव, उसके बाद बने थे राजेश ठाकुर और अब नए बने हैं केशव महतो कमलेश.

    कमलेश के सामने ओबीसी वोट को गोल बंद करने की सबसे बड़ी चुनौती

    झारखंड विधानसभा चुनाव के पहले कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष को बदल दिया है. तो फिर सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या पिछड़ा वोट बैंक,विशेष कर कुरमी वोट बैंक साधने के लिए कांग्रेस ने केशव महतो के कंधों पर जिम्मेवारी दी है. राजनीतिक क्षेत्र में यही चर्चा है कि कुरमी जाति को साधने के लिए कांग्रेस की ओर से यह कदम उठाया गया है. वैसे झारखंड में ओबीसी की आबादी लगभग 42% है. इसको देखते हुए भी कांग्रेस ने इस समाज के नेता को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है. कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद कमलेश के सामने कांग्रेस और गठबंधन के पक्ष में ओबीसी वोट को गोल बंद करने की सबसे बड़ी चुनौती होगी. जिस क्षेत्र सिल्ली से वह आते हैं, वहां से झारखंड बनने के बाद आजसू और झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक हुए हैं.

    झारखंड की वर्तमान राजनीति में जयराम महतो बड़ा फैक्टर बनकर उभरे हैं. वह भी कुरमी समाज से आते है. ऐसे में नवनियुक्त कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के सामने अपने विधानसभा क्षेत्र के साथ-साथ राज्य के दूसरे विधानसभा क्षेत्र में भी ओबीसी मतदाताओं को एक जुट करने की एक बड़ी चुनौती होगी. केशव महतो एकीकृत बिहार  में सिल्ली से दो बार विधायक रह चुके हैं. बिहार सरकार में वे मंत्री भी बने थे.

    विधानसभा चुनाव में ओबीसी वोट बैंक खासकर कुरमी वोट बैंक को साधने के लिए सभी पार्टी कर रही प्रयास  

    इधर डॉक्टर रामेश्वर उरांव को विधायक दल का नेता बनाया गया है. यानी आदिवासियों को भी साधने की कांग्रेस ने कोशिश की है. आलमगीर आलम के जेल जाने के बाद यह पद खाली था. पिछले कई दिनों से चर्चा चल रही थी कि कांग्रेस झारखंड में संगठन में बड़ा परिवर्तन करने जा रही है. इसके लिए लगभग 20 नेताओं को दिल्ली बुलाया गया था. सबसे अलग अलग बातचीत की गई थी. उसके बाद यह निर्णय लिया गया है. जो भी हो झारखंड में विधानसभा चुनाव में ओबीसी वोट बैंक खासकर कुरमी वोट बैंक को साधने के लिए हर एक पार्टी प्रयास कर रही है. आजसू तो  कुरमी की पार्टी ही कही जाती है. फिर जदयू भी झारखंड में इस बार पैर जमाने की कोशिश करेगा. जयराम महतो बड़े फैक्टर बनकर उभरे हैं. इसको देखते हुए भी कांग्रेस ने इसी समाज के नेता को प्रदेश की बागडोर सौंप दी है. अब देखना है कि 2019 के परिणाम से कांग्रेस कितना आगे निकल पाती है.

    रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो 


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