रांची(RANCHI): झारखंड की शांत पड़ी सियासत में अचानक सत्ता के समीकरण बदलने की चर्चा तेज है. इस बीच ही कांग्रेस-झामुमो एक दूसरे पर ही सवाल खड़ा करने लगे. ऐसा लगा की मानो कल ही राज्य में कांग्रेस गठबंधन से बाहर हो जाए और नए समीकरण के साथ सरकार का स्वरूप दिखे. इस बीच ही जदयू विधायक सरयू राय के बयान के बाद चर्चा को और हवा मिल गई.जिससे पूरे झारखंड में अब यह सवाल है कि आखिर क्या होने वाला है. क्या सच में सरकार बदल सकती है.
ऐसे में अगर देखे तो हाल में शुरू हुए बवाल को पाटने की कोशिश दोनों राजनीतिक दल के द्वारा की जा रही है. जिससे फिलहाल यह चर्चा रुक जाए. कांग्रेस का मानना है कि उन्हे प्रभारी के बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया. वह अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की बात कर रहे थे. खुद सूबे के मुखिया हेमंत सोरेन शुरू से इसके पक्षधर रहे है कि जहां गलत होगा वहाँ आवाज उठाना जरूरी है. अब अगर इसे झामुमो से टकराव से जोड़ा जाए तो वह सही नहीं है.
वही झामुमो का मानना है कि यह सब मीडिया में चल रहा है. राजनीति में कभी कभी आपस में बयान बाजी हो जाती है अब उसे सरकार से जोड़ा कर देखना सही नहीं है. जहां तक गठबंधन मजबूती से है और आगे रहेगा. फिलहाल कोई दिक्कत नहीं है.
अगर देखे तो फिलहाल राज्य में कुछ नहीं होने वाला है. असम चुनाव के बाद राज्यसभा का चुनाव झारखंड की 2 सीट पर होना है. इसके बाद ही कुछ नए समीकरण पर बात शुरू हो सकती है. इसी का ईशारा सभी विधायक और नेता कर रहे है.
चुनाव में जहां राज्यसभा की सीट पर झामुमो का दावा है तो वहीं कांग्रेस भी एक सीट पर दावा कर रही है. जिसमें अगर बात बिगड़ती है तो फिर झामुमो कोई फैसला ले सकता है. इसके बाद ही कुछ उलट फेर देखने को मिल सकता है. क्योंकि झारखंड में झामुमो कोई भी निर्णय लेते की ताकत अकेले रखता है. इनके पास आकड़े अधिक हैं.
Thenewspost - Jharkhand
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