जमशेदपुर (JAMSHEDPUR): जैक 8वीं बोर्ड परीक्षा परिणाम में संथाली छात्रों को डी ग्रेड देने पर आदिवासी समाज में आक्रोश देखा जा रहा है. इसको लेकर जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित सर्किट हाउस में मंगलवार को आदिवासी पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था एवं ओलचिकी हूल बैसी के संयुक्त तत्वावधान में प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया गया. इस सम्मेलन में स्वशासन व्यवस्था के अगुवा, सामाजिक प्रतिनिधि और संथाल समाज के कई प्रमुख लोग शामिल हुए.
सम्मेलन में झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) द्वारा सत्र 2025-26 में आयोजित 8वीं बोर्ड परीक्षा के परिणाम को लेकर नाराजगी जताई गई. वक्ताओं ने आरोप लगाया कि पूरे राज्य में संथाली भाषा के छात्र-छात्राओं को इस विषय में डी ग्रेड दिया गया है. जबकि अन्य विषयों में उनका प्रदर्शन काफी बेहतर रहा है. इसे लेकर समाज में गहरा आक्रोश है और इसे वक्ताओं ने इसे एक सोची-समझी साजिश बताया. जिससे छात्रों का अपनी मातृभाषा से मोहभंग हो.
उत्तरपुस्तिकाओं की पुनः जांच की मांग
समाज के प्रतिनिधियों ने मांग की कि परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं की पुनः जांच कराई जाए. दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए. वक्ताओं ने संथाली भाषा के विकास की उपेक्षा का भी आरोप लगाया गया. वक्ताओं ने कहा कि वर्षों पहले 10 हजार जनजातीय शिक्षकों की बहाली की प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन अब तक उसे पूरा नहीं किया गया. जिससे छात्रों को पढ़ाई में दिक्कत हो रही है.
संथाली भाषा की आधिकारिक लिपि ओलचिकी है, इसके बावजूद परीक्षा में देवनागरी लिपि में लिखने का निर्देश दिया गया. वक्ताओं ने जेटेट परीक्षा को जल्द आयोजित करने और उसमें ओल चिकी लिपि को मान्यता देने की मांग की.
मांग पूरी नहीं तो होगा आंदोलन
इस दौरान संथाली भाषा को राज्य में प्रथम राजभाषा का दर्जा देने की मांग की गई. इसके अलावा सभी सार्वजनिक स्थानों पर ओल चिकी लिपि में नाम लिखने, संथाली एकेडमी काउंसिल के गठन और 2026-27 सत्र से ओल चिकी लिपि में पढ़ाई शुरू करने की मांग भी उठाई गई. सम्मेलन में मौजूद सामाजिक नेताओं ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो चरणबद्ध और उग्र आंदोलन किया जाएगा.


