झारखंड में फर्जी भुगतान पर सख्ती: 30 दिनों में हटेंगे वर्षों से जमे लेखा अधिकारी, मुख्य सचिव ने दिया आदेश

    झारखंड में फर्जी भुगतान पर सख्ती: 30 दिनों में हटेंगे वर्षों से जमे लेखा अधिकारी, मुख्य सचिव ने दिया आदेश

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK): झारखंड में फर्जी वेतन विपत्र के जरिए करोड़ों रुपये की निकासी के मामलों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है. मुख्य सचिव अविनाश कुमार ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि एक ही स्थान पर तीन वर्षों से कार्यरत लेखा से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों का 30 मई तक अनिवार्य रूप से तबादला किया जाए. इस आदेश के तहत वरीय लेखा सहायक, लेखा सहायक, लेखा अधीक्षक, लेखापाल और विपत्र लिपिक जैसे पदों पर लंबे समय से तैनात कर्मियों को हटाने की प्रक्रिया तेज की जाएगी.

    मुख्य सचिव ने यह भी स्पष्ट किया है कि संविदा, आउटसोर्सिंग या मानदेय पर कार्यरत कर्मचारियों को लेखा और वित्तीय कार्यों से दूर रखा जाए, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता पर अंकुश लगाया जा सके. सरकार का मानना है कि लंबे समय तक एक ही जगह पर पदस्थापना से पारदर्शिता प्रभावित होती है और वित्तीय गड़बड़ियों की संभावना बढ़ जाती है. हालांकि, इस आदेश को लागू करने में कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी सामने आ रही हैं. सरकारी दफ्तरों से जुड़े जानकारों का कहना है कि बड़ी संख्या में कार्यालयों में नियमित कर्मचारियों की कमी है, जिसके कारण आउटसोर्स या संविदा पर नियुक्त कंप्यूटर ऑपरेटरों पर निर्भरता बढ़ गई है.

    पिछले कई वर्षों से टाइपिस्ट जैसे पदों पर नई नियुक्तियां नहीं होने के कारण कार्यालयों का अधिकांश काम इन्हीं अस्थायी कर्मियों के सहारे चल रहा है. ऐसे में फाइलों, प्रस्तावों और विभागीय प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी इन्हीं कर्मचारियों के पास होती है. खासकर सचिवालय और क्षेत्रीय कार्यालयों में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है. इस स्थिति में अचानक बदलाव लागू करना आसान नहीं माना जा रहा है. फिर भी सरकार वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इस दिशा में सख्त कदम उठाने के संकेत दे चुकी है.



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