झारखंड में हाथी और इंसान दोनों असुरक्षित!सीएम के आदेश के बाद भी नींद में सोया है वन विभाग

    Both elephants and humans are unsafe in Jharkhand! The Forest Department remains asleep despite the Chief Minister's orders.|झारखंड में हाथी और इंसान दोनों असुरक्षित!सीएम के आदेश के बाद भी नींद में सोया वन विभाग

    रांची(RANCHI): झारखंड में हाथी से मारे जाने वाले लोगों की संख्या हर दिन बढ़ रही है. बीते दो माह से 36 से अधिक लोगों की जान चली गई. जबकि तीन हाथी की मौत हुई. वन विभाग ना तो इंसान को बचा पा रहा और ना ही हाथी को ऐसे में सवाल उठने लगा की मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अधिकारियों को निर्देश दिया था हाथी को कॉरीडोर से पार कराया जाएगा. जिससे हाथी भी सुरक्षित रहे और किसी को नुकसान भी ना उठाना पड़े. लेकिन इस आदेश के दूसरे दिन ही अब बरकाकाना में दो हाथी की जान ट्रेन से कटने से चली गई.               

    सबसे पहले बात हाथी की मौत की कर लेते है. बरकाकाना-बरवाडीह रेलखंड पर आमिलान-निद्रा के बीच मालगाड़ी की चपेट में आने से एक हाथी का बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसकी देर रात मौत हो गई. घटना के बाद हाथियों का झुंड आक्रोशित होकर रेल पटरी पर डट गया. चंदवा थाना क्षेत्र के पुतरी टोला गांव के पास हुई इस घटना ने बरकाकाना–बरवाडीह रेलखंड पर रेल परिचालन पूरी तरह ठप कर दिया.

    शाम करीब 7:30 बजे से शुरू हुआ यह गतिरोध आधी रात तक बना रहा. वन विभाग की टीम ने मशाल जलाकर हाथियों को हटाने का प्रयास किया, लेकिन वे लंबे समय तक पटरी से नहीं हटे. करीब साढ़े चार घंटे बाद रात 12 बजे के आसपास झुंड को हटाया जा सका, जिसके बाद 12:20 बजे अप लाइन पर परिचालन बहाल हुआ.इस दौरान वंदे भारत पलामू एक्सप्रेस समेत कई ट्रेन आस पास के स्टेशन पर रुकी रही.  

    इससे पहले चाईबासा में हाथी की मौत हो चुकी है. पश्चिमी सिंह भूम जिले में हाथी के आतंक से 25 से अधिक लोगों की जान चली गई. लेकिन अचानक उसी दंतैल हाथी मृत पाई गई. जिसके बाद वन विभाग की टीम ने जांच शुरू की.

    दूसरी तरफ इंसानों की बात करें पश्चिमी सिंघभूम में 25 लोगों की मौत हो गई. जबकि बोकारो में पाँच लोगों की जान गई इसी कड़ी में हजारीबाग में हाथी ने एक ही परिवार के पाँच लोगों को मौत के घाट उतार दिया. इसके साथ गढ़वा औरअन्य जिले से भी हाथी के उत्पात की खबरे सामने आई. इतना सब कुछ होने के बाद भी विभाग सोया रहा.

    आखिर में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हाई लेबल मीटिंग की और अधिकारियों के साथ हाथी के आतंक को लेकर कई बिंदुओं पर चर्चा की. जिसमें यह आदेश दिया कि हाथी को बचाते हुए लोगों की ज़िंदगी को भी बचाने की प्राथमिकता है. बैठक में आदेश दिया गया कि हाथी को सेफ कोरोडॉर से पार कराया जाएगा. जिससे हाथी की मौत ना हो और किसी को कोई नुकसान भी ना उठाना पड़े.

    इस बीच मुख्यमंत्री के आदेश के बाद वन विभाग ने कर्नाटक से हथिनी मंगाने का प्रस्ताव दिया. जिससे पागल हाथी को कंट्रोल किया जा सके. विभाग ने 6 ट्रेंड कुनकी हाथी को मंगाने की बात कही.

    लेकिन सब बाते सिर्फ बाते तक सीमित दिखी. वन विभाग की टीम पर कई बार आरोप लगे है कि हाथी के मॉवमेंट को वह ट्रैक नहीं करते है. इसी का नतीजा है कि कभी इंसान तो कभी खुद हाथी की जान चली जाती है.     और फिर बाद में हंगामा और विभाग के दावे शुरू हो जाते है.                   


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