धनबाद में भाजपा : क्या ढुल्लू महतो-पीएन सिंह एक हो गए, क्या गुल खिलाने जा रही है "सतुआ" की राजनीति?

    धनबाद में भाजपा : क्या ढुल्लू महतो-पीएन सिंह एक हो गए, क्या गुल खिलाने जा रही है "सतुआ" की राजनीति?

    धनबाद (DHANBAD): सतुआ की राजनीति की धनबाद से लेकर रांची तक खूब चर्चा है.आखिर चर्चा हो भी क्यों नहीं, दो ध्रुव आपस में मिले हैं. यह मेल प्रदेश के हस्तक्षेप से हुआ है या लोकल राजनीति को साधने का हिस्सा,समय के अनुसार गांठ खुलेगा. जाहिर है सतुआ की जो नई राजनीति धनबाद में शुरू हुई है, यह आगे क्या गुल खिलाएगी, क्या समीकरण तैयार करेगी, क्या गठजोड़ होगा, यह तो अभी भविष्य के गर्भ में है. लेकिन इतना तो तय है कि सांसद और पूर्व सांसद के बीच चल रही खटास अब खत्म होने के कगार पर पहुंच गई है. 

    क्या इस गठजोड़ के दूरगामी राजनीतिक परिणाम होंगे

    इस गठजोड़ के दूरगामी राजनीतिक  परिणाम होंगे. क्या संजीव सिंह के मेयर पद पर भारी मतों से जीतने का यह दबाव है अथवा जिला कमेटी में समर्थकों को जगह नहीं मिलने का असर ,इस पर अभी तरह-तरह के तर्क दिए जा रहे है. भाजपा नेता और कार्यकर्ता कह रहे हैं कि देखते जाइए, आगे आगे होता है क्या. बता दें कि मंगलवार को सतुआन के दिन सांसद ढुल्लू महतो पूरे लाव लश्कर के साथ पूर्व सांसद पशुपतिनाथ सिंह के आवास पहुंचे. घंटो  दोनों साथ रहे, भोग भी लगा. वैसे भी कल से नए वर्ष की शुरुआत हुई है, तो नए साल में धनबाद भाजपा में नए समीकरण की शुरुआत  हुई है. दरअसल, लोकसभा चुनाव के समय से सांसद और पूर्व सांसद के बीच मनमुटाव जग जाहिर था. लेकिन मंगलवार को दोनों ओर से नई शुरुआत हुई है. इस मुलाकात के कई तरह के मायने निकाले जा रहे हैं. 

    चुनाव जीतने के बाद पहली बार पहुंचे थे सांसद 

    जानकारी के अनुसार सांसद ढुल्लू महतो लोकसभा चुनाव के दौरान उम्मीदवार घोषित होने के बाद सांसद पीएम सिंह से आशीर्वाद लेने उनके घर गए थे. उसके बाद 14 अप्रैल को वह पी एन सिंह के घर पहुंचे. दरअसल, चुनाव के बाद भी दोनों की दूरियां कम नहीं हुई थी. जानकार सूत्र बता रहे हैं कि सांसद ढुल्लू महतो का पशुपति बाबू के घर जाना शिष्टाचार से कहीं अधिक रणनीति का एक नया प्रयोग माना जा रहा है. अब दोनों मिलकर संगठन को अपनी ताकत दिखा सकते हैं. कहा तो यह भी जा रहा है कि दोनों के समर्थकों को जिला और ग्रामीण कमेटी में तरजीह नहीं मिली है. इस वजह से दोनों नाराज चल रहे थे और एक नए समीकरण का उदय हुआ है. कार्यकर्ता दबी जुबान में दो-तीन कारण बता रहे हैं. यह कारण धीरे-धीरे साफ होंगे और इसका प्रभाव कैसे पड़ेगा, यह देखने वाली बात होगी.

    रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो 


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