भगवान परशुराम का तपस्थली है गुमला का टांगीनाथ, जहां साक्षात मौजूद हैं शिव

    भगवान परशुराम का तपस्थली है गुमला का टांगीनाथ, जहां साक्षात मौजूद हैं शिव

    गुमला जिला का प्रसिद्ध टांगीनाथ धाम मंदिर इन दिनों लोगों की आस्था और विश्वास का केंद्र बना हुआ है, ना केवल सावन में बल्कि सालों भर इस मंदिर में शिव भक्तों  तांता लगा रहता है. टांगीनाथ पहाड़ पर लगभग 300 फीट ऊंचे स्थान पर स्थित है.इस मंदिर की कई खासियत है जो लोगों को अपनी और आकर्षित करती है जिनमें भगवान शिव का त्रिशूल और यहां मौजूद सैकड़ों की संख्या में शिवलिंग लोगों की आस्था और विश्वास का केंद्र बनी हुई है गुमला जिला मुख्यालय से 100 किलोमीटर की दूरी पर सुंदर वादियों के बीच यह मंदिर लोगों के लिए काफी आस्था और विश्वास का केंद्र बना हुआ है, लोगों का मानना है कि इस मंदिर में आकर पूजा करने से अपनी मनोकामना ना पूरी होती है. इस मंदिर के पुरोहितों का मानना है कि सालों भर  झारखंड के अलावा बाहर भी लोग यहां पहुंचते हैं.

    गुमला के घने जंगल और नक्सल प्रभावित इलाके में बसा बाबा टांगीनाथ धाम का मंदिर अपने आप में कई मान्यताओं के कारण हमेशा सुर्खियों में रहता है कहा जाता है झारखंड के गुमला जिले में भगवान परशुराम का तप स्थल है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान परशुराम ने यहां शिव की घोर तपस्या की थी और उसके बाद अपने फरसे को वहीं पर गाड़ दिया था. इस फरसे की आकृती त्रिशुल से काफी हद तक मिलती जुलती है जिस कारण लोग इस फरसे की पूजा करते हैं यहां पर कफी संख्या में पुरानी मूर्तियां है घने जंगलों के बीच स्थित इस मंदिर के बारे में कहा जाता है की यहां भगवान परशुराम का फरसा गड़ा हुआ है हजारों वर्ष पुरानी कलाकृति है जो कि आज भी अपनी पुरानी स्थिति में मौजूद है इस मंदिर में किसी शिवलिंग की पूजा नहीं बल्कि एक चंदन के वृक्ष के टुकड़े की पूजा होती है स्थानीय आदिवासी ही यहां के पुजारी है और इनका कहना है कि यह मंदिर बेहद प्राचीन है. मान्यता यह है कि भगवान शिव इसी चंदन के वृक्ष में अंतर्ध्यान हो गए थे, उसी समय से इस चंदन के वृक्ष के हिस्से को मुख्य पूजा का केंद्र मानकर पूजा की जाती है, लंबे समय तक  मंदिर काफी जीर्णशीर्ण अवस्था में था, लेकिन स्थानीय लोगों और झारखंड सरकार के पर्यटन विभाग की पहल से इस मंदिर को भव्य रुप दिया गया था.
    स्थानीय लोगों की मानें तो इस मंदिर परिसर में पहुंचते ही एक अनोखी अनुभूति का एहसास होता है. अगर सरकार की ओर से इस स्थल के विकास को लेकर पहल की जाए तो निश्चित रूप से ना केवल झारखंड बिहार बल्कि पूरे राज्य में इस स्थल का अपना एक अलग महत्व होगा .


    प्रकृति की गोद में बसा टांगीनाथ मंदिर अपनी अनोखी कहानियों के कारण प्रसिद्ध तो जरूरत है, लेकिन दुर्भाग्य की बात है झारखंड की सरकार द्वारा इस मंदिर को सही रूप से विकसित करने को लेकर पहल आज तक नहीं की गई है. हालांकि हाल के दिनों में पर्यटन विभाग की ओर से मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण को लेकर कुछ काम तो किया गया है लेकिन इस मंदिर परिसर को जिस रूप में विकसित किया जाना चाहिए उसको लेकर पहल नहीं होने से स्थानीय लोगों में भी नाराजगी है सरकार को चाहिए कि ऐतिहासिक धरोहर के रूप में मौजूद इस स्थल को सही रूप से ना केवल विकसित करें बल्कि इसके ऐतिहासिक मान्यताओं को जानने के लिए पुरातत्व विभाग की ओर से विशेष अध्ययन का काम भी करवाएं.


    the newspost app
    Thenewspost - Jharkhand
    50+
    Downloads

    4+

    Rated for 4+
    Install App

    Our latest news