होर्मुज संकट के बीच ईरान का बड़ा फैसला: जरूरी जहाजों को मिली राहत, खाने-पीने की सप्लाई को रास्ता खुला

    होर्मुज संकट के बीच ईरान का बड़ा फैसला: जरूरी जहाजों को मिली राहत, खाने-पीने की सप्लाई को रास्ता खुला

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK): ईरान ने एक अहम और मानवीय फैसला लिया है, जो ऐसे समय में सामने आया है जब पूरा पश्चिम एशिया भीषण संघर्ष और आपूर्ति संकट से जूझ रहा है. इस कदम को वैश्विक स्तर पर राहत देने वाला माना जा रहा है.

    ईरान की सरकारी एजेंसी के अनुसार, कृषि उप मंत्री हूमन फाथी ने पोर्ट्स एंड मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (PMO) को लिखे पत्र में बताया है कि सरकार और सशस्त्र बलों ने विशेष रूप से खाद्यान्न और पशुधन लेकर चलने वाले जहाजों को सुरक्षित मार्ग देने पर सहमति जताई है.

    स्ट्रेट में फंसे हजारों लोग

    युद्ध और तनाव के कारण हालात बेहद गंभीर हो गए हैं. जानकारी के मुताबिक, इजरायल और अमेरिका द्वारा तेहरान पर हमलों के बाद, जिसमें सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई थी, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर कड़ा नियंत्रण कर लिया था. अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के अनुसार, इस क्षेत्र में करीब 2000 जहाजों पर लगभग 20 हजार लोग फंसे हुए हैं.

    वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर

    होर्मुज जलडमरूमध्य के बाधित होने से दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ा है. तेल और अन्य जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होने से कीमतें आसमान छू रही हैं. इस संकट ने आम लोगों की जेब पर सीधा असर डाला है और कई देशों में महंगाई चरम पर पहुंच गई है.

    यूरोप-अमेरिका भी प्रभावित

    इस संघर्ष का असर केवल एशिया तक सीमित नहीं रहा. यूरोप और अमेरिका भी इसकी चपेट में हैं. जर्मनी में पेट्रोल की कीमतें दिन में कई बार बदल रही हैं, जबकि फ्रांस के करीब 16 प्रतिशत फ्यूल स्टेशनों पर कमी के कारण अफरा-तफरी की स्थिति है.

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस युद्ध का सबसे ज्यादा असर आम लोगों, खासकर निम्न आय वर्ग पर पड़ रहा है. बढ़ती महंगाई के बीच लोगों को भोजन और रोजमर्रा की चीजों के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है. ऐसे में ईरान का यह फैसला वैश्विक स्तर पर कुछ राहत जरूर दे सकता है.



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