वर्कलोड बन रहा मौत का कारण! स्ट्रेस और वर्क प्रेशर के कारण लोग हो रहे हार्ट प्रॉब्लम के शिकार, जानें कितना हो सकता है खतरनाक

    वर्कलोड बन रहा मौत का कारण! स्ट्रेस और वर्क प्रेशर के कारण लोग हो रहे हार्ट प्रॉब्लम के शिकार, जानें कितना हो सकता है खतरनाक

    टीएनपी डेस्क: आजकल हर कोई ऑफिस के काम के कारण स्ट्रेस में हैं. बढ़ रहे इस वर्कलोड का असर खासकर युवाओं में देखने को मिल रहा है. जैसे जैसे काम बढ़ता जा रहा है वैसे वैसे युवा स्ट्रेस और डिप्रेशन में जा रहे हैं. आज के समय में ऑफिस का वातावरण इतना टेंशन और स्ट्रेस भरा हो चुका है की उसका सीधा असर एम्प्लॉय के स्वास्थ्य पर देखने को मिल रहा है. आलम ये है कि, एम्प्लॉयज फिजिकली ही नहीं बल्कि मेंटली भी डिस्टर्ब हो रहे हैं. साथ ही ऑफिस में घंटों एक जगह बैठे रहने से कई खतरनाक बीमारी भी उन्हें अपना निशाना बना रही है. ये वर्कलोड स्ट्रेस इतना खतरनाक हो गया है की ये युवाओं में मौत का कारण बनता जा रहा है.

    वर्कलोड स्ट्रेस के कारण 26 वर्षीय चार्टर्ड अकाउंटेंट की ही मौत

    वर्कलोड स्ट्रेस के कारण गए जानों की बात करें तो ताजा मामला पुणे का देखने को मिला है. जहां अर्न्स्ट एंड यंग बिग फोर अकाउंटिंग फर्म में एक 26 वर्षीय चार्टर्ड अकाउंटेंट की मौत का कारण वर्कलोड स्ट्रेस बना है. वर्कलोड के कारण 26 वर्षीय युवती की मौत हार्ट अटैक से हो गई. वहीं, इमपलोय की मां ने अपनी बेटी की मौत का आरोप कंपनी द्वारा दिए गए वर्कलोड को बताया है. इमपलोय की मां का कहना है कि, इस कंपनी में काम शुरू करने के कुछ महीनों के अंदर ही वर्कलोड के कारण उनकी बेटी की भूख-नींद सब खत्म हो गई थी. जिसका अंत इस तरह से हुआ है. हालांकि, ये वर्कलोड स्ट्रेस से हुई मौत का पहला केस नहीं है. न जानें ऐसे कितने लोगों ने अपनी जान इस स्ट्रेस के कारण गंवा दी है. पुणे का यह मामला तो सबके सामने आ गया है वरना दुनिया में ऐसे न जानें कितने मामले हैं जिसे सिर्फ हार्ट अटैक समझकर छोड़ दिया जाता है.

    वर्कलोड से 26 वर्षीय चार्टर्ड अकाउंटेंट की मौत होने के बाद सोशल मीडिया पर संग्राम छिड़ा हुआ है. कई इस बात पर सवाल उठा रहे हैं की क्या वाकई वर्कलोड मौत का कारण बन रहा है तो वहीं दूसरी तरफ लोग इस बात पर से पर्दा उठा रहे हैं की हां सच में अब वर्कलोड लोगों की जान ले रहा है. इस बात में बहुत हद तक सच्चाई है. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल हैं की आखिर ये वर्कलोड कैसे बढ़ रहा है और लोगों की मौत का कारण कैसे बन रहा है.

    प्रेशर में काम करने से हो रहा दिमाग पर भी असर

    किसी भी ऑफिस में 8 घंटे या ज्यादा से ज्यादा 9 घंटे तक ही काम करने का समय होता है. लेकिन टारगेट पूरा नहीं होने पर इमपलोयीस 9 घंटे से ज्यादा ऑफिस में रुक कर या फिर घर में रात-रात तक जाग कर काम को पूरा कर रहे हैं. ऐसे में प्रेशर में आकर काम करने से स्ट्रेस और डिप्रेशन के तो शिकार हो ही रहे हैं साथ ही नींद पूरा न होने पर भी कई तरह की बीमारियों को भी न्यौता दे रहे हैं. हाई ब्लड प्रेशर, कॉलेस्ट्रॉल जैसी बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है जो हार्ट से जुड़ी बीमारी होने की संभावना को बढ़ा देती है.

    वर्कलोड से क्या खतरा है

    1. लंबे समय तक एक जगह पर बैठकर काम करने से शरीर में कई तरह की दिक्कतें आ सकती है.
    2. हाई बीपी और कोलेस्ट्रॉल का खतरा हो सकता है, जिससे हार्ट से जुड़ी बीमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है.
    3. ब्लड सर्कुलेशन (Blood Circulation) और ब्लड क्लाट की समस्या भी हो सकती है.
    4. ज्यादा स्ट्रेस लेने से हार्ट फेल या हार्ट स्ट्रोक होने का खतरा भी हो जाता है.
    5. वर्कलोड से दिमाग पर भी असर पड़ता है. कई तरह की मानसिक समस्याएं जैसे स्ट्रेस, डिप्रेशन, इनसोमनिया जैसी कई प्रॉब्लमस हो सकती हैं. कई मामलों में तो डिप्रेशन से पीड़ित कई लोग तो वर्कलोड से परेशान होकर खुद की जिंदगी खुद से ही खत्म कर लेने का फैसला ले लेते हैं.
    6. डायबिटीज से लेकर वजन बढ़ने या घटने तक की समस्या हो सकती है.

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