टीनपी डेस्क (TNP DESK): अस्थमा (ASTHAMA) एक आम लेकिन गंभीर श्वसन रोग है, जो दुनियाभर में करोड़ों लोगों को प्रभावित करता है. इसके बावजूद, इस बीमारी को लेकर समाज में कई गलतफहमियां और मिथक फैले हुए हैं. और इसका नतीजा यह होता है कि लोग सही समय पर इलाज नहीं कराते या गलत तरीके अपनाते हैं, जिससे समस्या और बढ़ जाती है. वर्ल्ड अस्थमा डे के मौके पर आइए जानते हैं अस्थमा से जुड़े 7 बड़े झूठ और उनके पीछे का सच-
- झूठ: अस्थमा सिर्फ बचपन में ही होती है
सच: यह धारणा बिल्कुल गलत है. अस्थमा किसी भी उम्र में हो सकता है. हालांकि, यह अक्सर बचपन में शुरू होता है, लेकिन कई लोग वयस्क होने पर भी इसका शिकार होते हैं. कुछ मामलों में तो 40-50 साल की उम्र में भी अस्थमा विकसित हो सकता है. इसलिए उम्र के आधार पर इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है.
- झूठ: अस्थमा होने पर व्यायाम नहीं करना चाहिए
सच: असल में, सही देखरेख और दवाओं के साथ अस्थमा के मरीज सामान्य लोगों की तरह व्यायाम कर सकते हैं. हल्की-फुल्की एक्सरसाइज जैसे वॉकिंग, योग और स्विमिंग फेफड़ों को मजबूत बनाती हैं. कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी भी अस्थमा से पीड़ित रहे हैं, फिर भी उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया है. बस जरूरी है कि डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही व्यायाम करें.
- झूठ: इनहेलर की आदत लग जाती है
सच: यह सबसे आम और खतरनाक मिथकों में से एक है. इनहेलर अस्थमा का सबसे प्रभावी और सुरक्षित इलाज है. यह सीधे फेफड़ों तक दवा पहुंचाता है, जिससे तुरंत राहत मिलती है. इसमें किसी तरह की लत नहीं लगती. बल्कि, इनहेलर से दूरी बनाना मरीज की स्थिति को और बिगाड़ सकता है.
- झूठ: अस्थमा संक्रामक (छूत की) बीमारी है
सच: अस्थमा कोई संक्रमण नहीं है, इसलिए यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता. यह मुख्य रूप से एलर्जी, जेनेटिक कारणों या पर्यावरणीय कारकों की वजह से होता है. धूल, धुआं और प्रदूषण इसके ट्रिगर हो सकते हैं, लेकिन यह छूने या साथ रहने से नहीं फैलता.
- झूठ: अस्थमा का स्थायी इलाज नहीं है
सच: यह सही है कि अस्थमा का कोई स्थायी इलाज (क्योर) नहीं है, लेकिन इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है. सही दवाओं, इनहेलर और लाइफस्टाइल में बदलाव के जरिए मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं. इलाज न करना या बीच में छोड़ देना स्थिति को गंभीर बना सकता है.
- झूठ: अस्थमा के मरीजों को पालतू जानवर नहीं रखना चाहिए
सच: यह पूरी तरह सच नहीं है. कुछ लोगों को पालतू जानवरों के बाल या त्वचा से एलर्जी हो सकती है, लेकिन हर मरीज के लिए यह समस्या नहीं होती. यदि किसी को एलर्जी है, तो सफाई का विशेष ध्यान रखकर और डॉक्टर की सलाह लेकर पालतू जानवर रखे जा सकते हैं. हर मरीज का केस अलग होता है.
- झूठ: अस्थमा सिर्फ सर्दियों में होता है
सच: अस्थमा किसी भी मौसम में हो सकता है. हालांकि सर्दियों में ठंडी हवा और प्रदूषण के कारण इसके लक्षण बढ़ सकते हैं, लेकिन गर्मी, बारिश या बदलते मौसम में भी ट्रिगर एक्टिव हो सकते हैं. इसलिए सालभर सावधानी जरूरी है.
अस्थमा को लेकर फैलती गलत धारणाएँ मरीजों के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं। जरूरत है तो बस सही जानकारी और जागरूकता कि. अगर आप या आपके आसपास कोई अस्थमा से पीड़ित है, तो इन मिथकों से दूर रहें और डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता दें.

