देव आनंद: हिंदी सिनेमा के "स्टाइल आईकॉन "की आज जन्मशती,जानिए पचास के दशक में धनबाद की किस कोलियरी में की थी शूटिंग 

    देव आनंद: हिंदी सिनेमा के "स्टाइल आईकॉन "की आज जन्मशती,जानिए पचास के दशक में धनबाद की किस कोलियरी में की थी शूटिंग 

    टीएनपी डेस्क(TNP DESK): हिंदी सिनेमा के "स्टाइल आईकॉन "देव आनंद की आज जन्मशती है. देव आनंद महज एक अभिनेता नहीं बल्कि अपने आप में अदाकारी की एक पूरी संस्था थे. एक खास अंदाज में बोलना, झुक कर लहराते हुए चलना , चिपके पतलून, गले में स्कार्प ,सिर पर बैगी टोपी, यही तो था देव आनंद का अपना अंदाज. देव आनंद के भीतर की जिंदा दिल्ली ने उन्हें 80 वर्ष की उम्र में भी बूढ़ा नहीं होने दिया. वे न थके, ना रुके बस अपनी रचनात्मकता के सहारे आगे बढ़ते चले गए.

    शराबी फिल्म की शूटिंग के लिए धनबाद आए थे देव आनंद 

    50 के दशक में कोयलांचल में भी फिल्म की शूटिंग के लिए आए थे .लोग बताते हैं कि फिल्म शराबी की शूटिंग को पहुंचे थे. उस समय कोयला कर्मियों की हालत बहुत ही खराब थी. कोयला कर्मी आमदनी के 90% हिस्से को शराब में खर्च कर देते थे. यह लत उन्हें लगी या लगाई गई, इस पर बहस हो सकती है. क्योंकि उसी के बाद से यहां माफिया गैंग, सूदखोर गैंग की उत्पत्ति हुई . इन्हीं मजदूरों को आगे कर माफिया और सूदखोर गैंग काम करने लगे. उस समय प्राइवेट कोलियरी मलिक हुआ करते थे. उन्हें भी मजदूरों को दबाने के लिए लाठियों की जरूरत पड़ती थी.यही माफिया और सूदखोर गैंग उनकी मदद करते थे. उस समय से जो परंपरा शुरू हुई, वह कमोबेश आज भी जारी है. गैंग बदल गए, माफिया बदल गए, तरीका बदल गया,लेकिन मजदूरों का शोषण और उनकी आड़ में नेताओं की चमक बढ़ती चली गई.  यह आज भी जारी है.

    फिल्म में देव आनंद ने मार्मिक अभिनव कर दर्शकों का दिल जीत लिया था

    देव आनंद की फिल्म शराबी की अधिकांश शूटिंग भौरा में हुई थी. जो वर्तमान में भारत को किंग कोल लिमिटेड का  पूर्वी क्षेत्र कहलाता है. इस फिल्म में   जिंदगी को तबाह करने में शराब की भूमिका दिखाई गई थी. फिल्म में देव आनंद ने मार्मिक अभिनव कर दर्शकों का दिल जीत लिया था. उन दिनों कोयलांचल में काम करने वाले मजदूर शराब की दलदल में फंसे हुए थे. खदानों में हैड तोड़ मेहनत करने वाले श्रमिक अपनी मेहनत के पैसे का 90% हिस्सा शराब में खर्च कर देते थे. नतीजा उनकी और उनके परिजनों की स्थिति हमेशा दयनीय रहती थी.  फिर वह सूदखोर के पास जाते थे और उसके बाद सूदखोर उनकी खून चूसने में कोई कोताही  नहीं करते थे. लगभग 15 दिनों तक वह कोयलांचल में ठहरे थे.

    रिपोर्ट: धनबाद ब्यूरो 


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