सारंडा की सुंदरता पर लगा ग्रहण, एक तरफ कारो नदी का अस्तित्व खतरे में, दूसरी तरफ पेड़ो की कटाई जोरों पर

    सारंडा की सुंदरता पर लगा ग्रहण, एक तरफ कारो नदी का अस्तित्व खतरे में, दूसरी तरफ पेड़ो की कटाई जोरों पर

    चाईबासा (CHAIBASA) - सात सौ पहाड़ियों के बीच बसे सारंडा की गोद से निकल कर बहने वाली कारो नदी का अस्तित्व खतरे में आ गया है. बता दें कि नदी प्रदूषित हो कर अब सूखने लगी है. वर्ष 1993 में टेंनसा की पहाड़ियों के नीचे स्थित कारों नदी के उदगम स्थल पर खनन की मंजूरी मिलने के बाद से चिरस्त्रोता नदी सूखने लगी है. नदी के सूखने से यहां पर स्थित सारंडा जंगल के पेड़ पौधे के लिए भी खतरा उत्पन्न हो गया है. इस नदी को विलुप्त होने से बचाने के लिए कई वर्षों पूर्व सेव द नेचर संगठन की ओर से कारो नदी बचाओ अभियान शुरू किया गया था. अब एक बार फिर इस नदी को बचाने के लिए ऐसे ही आंदोलन करने की जरूरत है. तभी कारो नदी को बचाया जा सकता है.

    काल नदी

     बता दें कि इस नदी का उदगम टेनसा के पास पहाड़ियों के तलहटी में स्थित रायकला गांव से शुरू होता है. ग्रामीणों के अनुसार यह नदी चिरस्थाई थी. नदी के उदगम स्थल पर इतना तेज पानी का बहाव होता था कि एक बार यहां नहाने वाले पति-पत्नी डूब गए थे. यही कारण है कि नदी का नाम लोगों द्वारा काल नदी रख दिया गया. जो धीरे धीरे कारो नदी के रूप में लोकप्रिय हुआ. इस नदी के उदगम स्थल से लेकर टेनसा की पहाड़ी तक हजारों पेड़ जैसे साल, पिया, आसन, गंभारी, जामुन सहित इत्यादि पेड़ों से हरा भरा रहता था. साथ ही कारो नदी का पानी का बहाव काफी तेज भी था. लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल गई है. पानी के अभाव में आसपास के इलाका पूरी तरह वीरान होते जा रही है. वहीं इन पहाड़ियों से लाखों पेड़ कटने से इनकी सुंदरता पर भी ग्रहण लग रहा है.

    वाइल्ड लाइफ और मानव को सुरक्षा की ज़रुरत

    इस संबंध में झारखंड और उड़ीसा की सीमा क्षेत्र के झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिला के हद में सारंडा वन विभाग के को-ऑर्डिनेटर विपिन प्रधान ने 9 मई को बताया कि वर्तमान में कारो नदी को प्रदूषण मुक्त और सुरक्षित किया जाना नितांत आवश्यक है. उन्होंने कहा कि कारो नदी इस सारंडा वन क्षेत्र में रहने वाले वासियों के जीवन का आधार है. दिन प्रतिदिन नदी  प्रदूषित होने से जन समस्या बढ़ती जा रही है. प्रदूषण को रोकने और नदी को सुरक्षित रखने के लिए समूह को एकजुट होकर प्रयास करना होगा. कारो नदी उड़ीसा ही नहीं बल्कि झारखंड राज्य कि सारंडा वन क्षेत्र के वासियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण जल स्रोत के रूप में जाना जाता है. उन्होंने बताया कि पूर्व में वन विभाग गुवा के सेवानिवृत्त पदाधिकारी गणेश लाल भगत के द्वारा कारो नदी के सफाई का अभियान चलाया गया था. बरहाल नदी के घटते जलस्तर एवं प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए इसे प्रदूषण से बचाने और मुहिम चलाना नितांत आवश्यक है. बगैर एकजुटता से मुहिम चलाएं बिना नदी को प्रदूषण मुक्त नहीं किया जा सकता है. को-ऑर्डिनेटर प्रधान ने कहा कि जब तक इस संदर्भ में जनसभा कर पहल नहीं की जाएगी,  इस समस्या का समाधान के लिए पहल नहीं हो सकेगा. आगे उन्होंने बताया कि उड़ीसा और झारखंड से जुड़े कारो करमपदा क्षेत्र से प्रवाहित होने वाले कारो नदी के लिए एक बैठक किरीबुरू में आयोजित की जाएगी. जिसमें वाइल्ड लाइफ और मानव को बचाने के लिए कारो नदी की उपयोगिता पर विचार विमर्श किया जाएगा.

    रिपोर्ट : संदीप प्रसाद, गुवा/चाईबासा

     


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