वाह साहब ! लिट्टी सेंकी, चाय बनाई और दिल और बिहार के खास अफसर की सादगी ने मोह लिया सबका दिल

    वाह साहब ! लिट्टी सेंकी, चाय बनाई और दिल और बिहार के खास अफसर की सादगी ने मोह लिया सबका दिल

    बख्तियारपुर (BAKHTIARPUR) : बिहार के शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) एस. सिद्धार्थ एक बार फिर अपनी सादगी और आम लोगों से जुड़ाव के कारण चर्चा में हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी अधिकारियों में गिने जाने वाले एस. सिद्धार्थ की जीवनशैली का यह अनोखा अंदाज़ उन्हें बाकी अफसरों से बिल्कुल अलग बनाता है. 

    रविवार को नवादा में स्कूल निरीक्षण के बाद लौटते समय उन्होंने अचानक बख्तियारपुर में एक लिट्टी-चाय की झोपड़ी पर रुककर जो किया, उसने वहां मौजूद लोगों का दिल जीत लिया है. उन्होंने न केवल बिना किसी पहचान के लिट्टी सेंकी, बल्कि खुद चाय भी बनाई. उनकी इस सहजता और ज़मीनी जुड़ाव से दुकानदार समेत आसपास के लोग आश्चर्यचकित रह गए है. जब यह खुलासा हुआ कि लिट्टी सेंकने वाला व्यक्ति कोई आम आदमी नहीं बल्कि बिहार के वरिष्ठतम आईएएस अधिकारियों में से एक एस. सिद्धार्थ हैं, तो लोग उनके इस अंदाज की सराहना करने लगे. 

    पहले भी कर चुके हैं आमजन जैसा जीवन जीने का प्रदर्शन : 
    एस. सिद्धार्थ इससे पहले भी कई मौकों पर आम आदमी की तरह जीवन जीने की मिसाल पेश कर चुके हैं. कभी सड़क किनारे ठेले से सब्जी खरीदते तो कभी रिक्शे और साइकिल से सफर करते नजर आए हैं. वे फुटपाथ पर नाई से दाढ़ी बनवाते और बिना लाव-लश्कर के मोटरसाइकिल पर शहर का दौरा करते देखे जा चुके हैं. यहां तक कि वे एक प्रशिक्षित पायलट भी हैं, और निजी तौर पर हवाई जहाज उड़ाने का भी अनुभव रखते हैं. बावजूद इसके, उनकी सादगी और आम जन से जुड़ने का अंदाज उन्हें जनता के बीच खास बनाता है. 

    ट्रेन में सफर, स्टेशन पर बच्चियों से रास्ता पूछा : 
    एस. सिद्धार्थ की सादगी का एक और उदाहरण पिछले साल 4 जून को सामने आया, जब वे बिना किसी पूर्व सूचना के एक सरकारी स्कूल का निरीक्षण करने निकल पड़े. उन्होंने दानापुर से बिहिया तक की यात्रा ट्रेन के स्लीपर कोच में आम यात्रियों की तरह खड़े होकर की और स्टेशन से बाहर निकलने के बाद जब उन्हें स्कूल का रास्ता नहीं पता था, तो वे सड़क पर मिल रही स्कूली बच्चियों से ही स्कूल का पता पूछते नजर आए. 

    एस. सिद्धार्थ की यह कार्यशैली जहां आम जनता के बीच उनकी एक सकारात्मक छवि बनाती है, वहीं प्रशासनिक क्षेत्र में भी यह एक प्रेरणास्रोत बन चुकी है. अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहते हुए जिस प्रकार वे सादगी और मानवीय जुड़ाव को प्राथमिकता देते हैं, वह अन्य अधिकारियों के लिए एक मिसाल है.


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