गाड़ियों पर VIP नंबर का क्रेज ! सिर्फ एक साल में 4117 नंबरों का रजिस्ट्रशन, सरकार की कमाई करोड़ों में

    The craze for VIP vehicle numbers! 4,117 vehicles were registered in just one year, earning the government crores. | गाड़ियों पर VIP नंबर का क्रेज ! सिर्फ एक साल में 4117  नंबरों का रजिस्ट्रशन, सरकार की कमाई करोड़ों में

    पटना(PATNA):  राज्य में अब बड़े शहर और मेट्रो सिटी के तर्ज पर हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है. सड़क पर लक्सजरी गाड़ी और उस गाड़ी में फ़ैन्सी नंबर का चलन भी बढ़ गया. गाड़ी और उसे रजिस्ट्रेशन नंबर की दीवानगी से राज्य सरकार को मोटा राजस्व प्राप्त हुआ. बीते दो माह में 4117 फ़ैन्सी नंबर जारी किए गए. जिसमें 6 करोड़ का राजस्व मिला है.जिसमें अकेले 2.46 करोड़ के वीआईपी नंबर राजधानी पटना के लोगों ने लिया है.    इसकी जानकारी परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने दी है.         

    परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि बीते दो महीने में (1 दिसंबर 2025 से 13 फरवरी 2026) कुल 4,117 फैंसी नंबर प्लेट जारी किए गए, जिससे राज्य सरकार को लगभग 6 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है. इस अवधि में सबसे ज्यादा फैंसी नंबर पटना जिले में रजिस्टर्ड हुए, जहां 1,597 नंबर प्लेट लिए गए. इससे पटना से अकेले 2.46 करोड़ रुपये का राजस्व जमा हुआ. इसके बाद मुजफ्फरपुर में 358, गया में 321, पूर्णिया में 189 और रोहतास में 174 फैंसी नंबर प्लेट जारी हुए. इन जिलों से क्रमशः 52.17 लाख, 41.10 लाख, 33.53 लाख और 20.90 लाख रुपये सरकारी खजाने में जमा हुए.

    निबंधन पेंडेंसी कम होने से लाभ: मंत्री

    उन्होंने कहा कि बीते दो महीने में डीटीओ कार्यालयों में वाहन निबंधन की पेंडेंसी को काफी हद तक कम किया गया है. इसके फलस्वरूप निबंधन व अन्य परिवहन संबंधित सुविधाएं प्राप्त करने वालों की का संख्या बढ़ी है. आगे बताया कि परिवहन विभाग के कामों में पारदर्शिता होने से भी लोगों के शौक आसानी से पूरे होने लगे हैं.

    फैंसी नंबर के लिए ई-नीलामी व्यवस्था

    मंत्री ने बताया कि राज्य में फैंसी नंबर प्लेट पाने के लिए नियम मौजूद हैं. बिहार मोटर वाहन(संशोधन) नियमावली, 1992 के नियम-64 के तहत फैंसी नंबरों का आवंटन ई-नीलामी के माध्यम से किया जा रहा है, ताकि पारदर्शी तरीके से आवंटन सुनिश्चित हो. गैर-परिवहन (निजी) और परिवहन वाहनों के लिए अलग-अलग आधार शुल्क निर्धारित हैं.

    नंबर प्लेटों को पांच समूहों (एक,भी,ही,डी,ई) में बांटा गया है, जहां ए समूह के प्रीमियम नंबर जैसे 0001, 0003, 0005, 0007, 0009 के लिए गैर-परिवहन वाहनों पर 1 लाख रुपये और परिवहन वाहनों पर 35 हजार रुपये शुल्क है. अन्य लोकप्रिय नंबर जैसे 1100, 1212, 2525, 9999 आदि भी उच्च शुल्क पर उपलब्ध हैं.

    यदि एक ही नंबर के लिए दो आवेदन आए तो ऐसी स्थिति में ई-नीलामी होती है, जिसमें भाग लेने के लिए आवेदकों को 1,000 रुपये का गैर-वापसी योग्य रजिस्ट्रेशन शुल्क जमा करना होता है. सर्वोच्च बोली लगाने वाले (एच-1) को फैंसी नंबर जारी कर दिया जाता है. बोली जीतने वाले को 7 दिनों में पूरी राशि जमा करनी होती है, अन्यथा नंबर रद्द हो जाता है और एच-2 को मौका मिलता है.अगर नीलामी में नंबर नहीं बिकता, तो उसे पुनः नीलामी के लिए जारी किया जा सकता है. बता दें कि जमा राशि कभी वापस नहीं होती और नंबर एक बार आवंटित होने के बाद परिवर्तित नहीं किया जा सकता.

    वाहन मालिक फैंसी नंबर के लिए vahan.parivahan.gov.in/fancy पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. लकी नंबर, जन्मतिथि या अन्य व्यक्तिगत पसंद के आधार पर लोगों की ओर से मोटी रकम खर्च करने का ट्रेंड देखा जा रहा है.


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