बिहार में उर्वरक माफियाओं पर सख्त एक्शन ! 115 FIR, 449 का लाइसेंस रद्द

    पटना. बिहार सरकार ने उर्वरक कालाबाजारी पर जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत बड़ी कार्रवाई की है. इस वित्तीय वर्ष में अब तक 115 उर्वरक प्रतिष्ठानों पर FIR दर्ज की गई है और 449 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस रद्द किए गए हैं.

    बिहार में उर्वरक माफियाओं पर सख्त एक्शन !  115 FIR, 449 का लाइसेंस रद्द

    पटना. बिहार सरकार ने उर्वरक कालाबाजारी पर जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत बड़ी कार्रवाई की है. इस वित्तीय वर्ष में अब तक 115 उर्वरक प्रतिष्ठानों पर FIR दर्ज की गई है और 449 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस रद्द किए गए हैं. ये जानकारी राज्य के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने शुक्रवार को दी.


    क्या है पूरा मामला?

    बिहार के कृषि विभाग ने उर्वरक की कालाबाजारी, जमाखोरी और अधिक मूल्य पर बिक्री रोकने के लिए पूरी तरह सख्त रुख अपनाया है. मंत्री राम कृपाल यादव ने साफ कहा कि "राज्य में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है" और किसानों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा है.


    सरकार का स्टॉक कितना है?

    राज्य सरकार के पास मौजूदा स्टॉक कुछ यूं है:

    • यूरिया: 2.45 लाख मीट्रिक टन
    • डीएपी: 1.46 लाख मीट्रिक टन
    • एनपीके: 2.05 लाख मीट्रिक टन
    • एमओपी: 0.41 लाख मीट्रिक टन
    • एसएसपी: 1.03 लाख मीट्रिक टन

    क्या है सरकार की स्पेशल स्ट्रैटजी?

    1. उड़नदस्ता दल का गठन

    मुख्यालय स्तर पर उड़नदस्ता दल बनाया गया है जो शिकायतों के आधार पर लगातार छापेमारी कर रहा है.

    2. पॉस मशीन और स्टॉक का सत्यापन

    उर्वरक दुकानों के पॉस मशीन में दर्ज स्टॉक और भौतिक स्टॉक का नियमित सत्यापन किया जा रहा है.

    3. प्रखंडवार आवंटन

    प्रखंडवार आवश्यकता और आच्छादन के अनुसार उर्वरक का उप-आवंटन सुनिश्चित किया जा रहा है ताकि किसी क्षेत्र में कमी न हो.

    4. अंतरराष्ट्रीय सीमा पर टाइट सिक्योरिटी

    विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे जिलों में छापेमारी तेज की गई है और सशस्त्र सीमा बल के साथ समन्वय स्थापित कर उर्वरक तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने का प्रयास किया जा रहा है.


    क्या कहते हैं मंत्री?

    राम कृपाल यादव ने कहा, "राज्य सरकार उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी एवं अधिक मूल्य पर बिक्री को रोकने के लिए पूरी तरह सख्त एवं सतर्क है. किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी."


    किसानों के लिए क्या मैसेज?

    मंत्री ने साफ किया कि राज्य के किसी भी जिले में उर्वरक की कोई कमी नहीं है. अगर किसी किसान को कोई परेशानी हो रही है तो वह सीधे कृषि विभाग से शिकायत कर सकता है.


    बड़ा सवाल: क्या यह कार्रवाई असरदार होगी?

    बिहार में उर्वरक कालाबाजारी लंबे समय से एक बड़ी समस्या रही है. सरकार की यह सख्त कार्रवाई निश्चित रूप से एक सकारात्मक कदम है. हालांकि, असली चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि यह अभियान निरंतर जारी रहे और किसानों तक उर्वरक सही दाम पर पहुंचे.

    बॉटम लाइन: बिहार सरकार ने उर्वरक माफियाओं के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया है. अब देखना है कि यह लड़ाई कितनी कारगर साबित होती है और किसानों को इसका कितना फायदा मिलता है.

    क्या आपको भी उर्वरक की कालाबाजारी का सामना करना पड़ा है? अपने अनुभव कमेंट में शेयर करें!


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