पूर्व सांसद आनंद मोहन की दहाड़, कहा- देश किसी के बाप का नहीं है, मेरे बारे में जानना चाहते हैं तो.....

    पूर्व सांसद आनंद मोहन की दहाड़, कहा- देश किसी के बाप का नहीं है, मेरे बारे में जानना चाहते हैं तो.....

    अररिया (ARARIYA) : बाहुबली पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह जेल से रिहा होने के बाद पहली बार एक सभा में नजर आए. जहां उन्होंने खुलेआम चुनौती दी. बता दें कि फारबिसगंज में बाबू वीर कुंवर सिंह के प्रतिमा का अनावरण समारोह रखा गया था.  इस समारोह के आनंद मोहन सिंह मुख्य अतिथि के रूप में आए थे साथ ही  उनके साथ उनकी पत्नी लवली आनंद भी मौजूद थी.

    मैं क्या चीज हूं जॉर्ज फर्नांडिस से पूछिए- आनंद मोहन सिंह

    आनंद मोहन ने प्रतिमा अनावरण के बाद खुले मंच से लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि मैं कानून पर विश्वास करता हूं, और मुझे इस बात का कोई गम नहीं है की 15 साल जेल में बिताया हूं, और अगर मेरे बारे में जानना चाहते हैं तो नवीन पटनायक से पूछिए, जॉर्ज फर्नांडिस से पूछिए कि मैं क्या चीज हूं. मैं हमेशा से सिद्धांत की लड़ाई लड़ने वाला व्यक्ति हूं.

    हमें फांसी पर चढ़ा दे मैं हंसते-हंसते तैयार हूं- आनंद मोहन सिंह

    पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह ने मंच पर दहाड़े हुए कहा यह देश किसी के बाप की नहीं है. सबों की खून से सींचा गया ये चमन भारत है. हिंदुस्तान सभी जाति धर्म से मिलकर बना है. और यहां सभी संविधान को मानने वाले है. उन्होंने कहा के अगर सरकार हमें दोषी समझती है तो हमें फांसी पर चढ़ा दे मैं उसके लिए हंसते-हंसते तैयार हूं. मेरा विश्वास कानून पर है.  

    मेरे पति दोषी है तो उन्हें फांसी की सजा दे दें- लवली आनंद

    आनंद मोहन की पत्नी और पूर्व सांसद लवली आनंद ने भी कहा हमने 15 साल बिना उनके गुजारा है. हमारे बच्चे किस भय के माहौल में जिये हैं इसको बताना संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि लवली आनंद संसद में चिल्ला चिल्ला कर कहती रही कि इस मामले की जांच सीबीआई से कराएं,  अगर मेरे पति दोषी है तो उन्हें फांसी की सजा दे दें.

    आनंद मोहन की जेल जाने की वजह

    आनंद मोहन पर  गोपालगंज के जिलाधिकारी जी कृष्णैया की हत्या का इल्जाम लगा था. ये हत्या 5 दिसंबर 1994 को मुजफ्फरपुर में की गई थी. 1985 बैच के आईएएस अधिकारी जी कृष्णैया वर्तमान तेलंगाना के महबूबनगर के रहने वाले थे.आनंद मोहन सिंह द्वारा कथित रूप से उकसाई गई भीड़ द्वारा कृष्णैया की हत्या कर दी गई थी. उन्हें उनकी आधिकारिक कार से बाहर खींच लिया गया और पीट-पीट कर मार डाला. बता दें कि आनंद मोहन को निचली अदालत ने 2007 में मौत की सजा सुनाई थी. एक साल बाद पटना उच्च न्यायालय ने सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था. मोहन ने तब फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन अभी तक कोई राहत नहीं मिली और वह 2007 से सहरसा जेल में है. उनकी पत्नी लवली आनंद भी लोकसभा सांसद रह चुकी हैं और उनके बेटे चेतन आनंद बिहार के शिवहर से राजद के विधायक हैं.

     


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